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बारिश में बढ़ा दूषित जल सप्लाई का खतरा:जल बोर्ड बना, आदेश जारी हुए… फिर भी नालियों से नहीं हटीं पानी की लाइनें

 

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बारिश शुरू होते ही शहर के कई इलाकों में दूषित पेयजल सप्लाई का खतरा बढ़ गया है। कारण यह है कि कई वार्डों में निगम की पाइपलाइनें अब भी नालियों के ऊपर या भीतर से गुजर रही हैं। इनमें रिसाव होने पर नाली का गंदा पानी जलापूर्ति लाइन में मिलकर घरों तक पहुंच सकता है।

जनवरी में जलबोर्ड गठन के बाद ऐसी पाइपलाइनें हटाने की कवायद शुरू हुई थी, लेकिन काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है। हाल ही में नगरीय प्रशासन विभाग ने भी सभी निकायों को इन्हें प्राथमिकता से शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं।

 में पुरानी बस्ती, रामनगर, कुशालपुर, ब्रह्मपुरी, महामाया मंदिर वार्ड, कचना की बीएसयूपी कॉलोनी और टिकरापारा के संजय नगर सहित कई जगह में जलापूर्ति लाइनें नालियों के ऊपर या भीतर से गुजरती मिलीं।

लोगों के अनुसार रिसाव होने पर बदबूदार और गंदा पानी घरों तक पहुंच चुका है। बरसात में नालियों में गंदगी बढ़ने से यह जोखिम और बढ़ जाता है।

शहर की सभी पाइपलाइनों का नक्शा तैयार करने की योजना भी अभी अधूरी है। कई पुरानी लाइनें दशकों पहले बिछाई गई थीं, जिनका पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। उनकी जानकारी के लिए निगम को पुराने लाइनमैन और ऑपरेटरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इनमें से कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे नेटवर्क का सटीक दस्तावेजीकरण चुनौती बना हुआ है।

इसी साल बना जलबोर्ड: जनवरी 2026 में गठित जलबोर्ड नगर निगम की एक समिति है। यह जलापूर्ति और पेयजल से जुड़ी समस्याओं का अध्ययन कर उनके समाधान के लिए सुझाव देता है। इसके पास वित्तीय अधिकार नहीं है।

खामियां मिलीं, लोग बोले-गंदा पानी आ रहा

में महामाया मंदिर वार्ड में नई बिछाई गई पाइपलाइनें भी नालियों से होकर गुजरती मिलीं। इनमें कुछ स्थानों पर लीकेज भी पाया गया। ब्रह्मपुरी क्षेत्र में पाइपलाइन नाली के बीच से गुजर रही है, जिसे सीमेंट के सहारे ऊपर टिकाया गया है।

वहीं कचना की बीएसयूपी कॉलोनी में अधिकांश घरों तक जलापूर्ति नालियों के ऊपर से गुजरने वाली पाइपलाइन से हो रही है। लोगों के अनुसार मई में पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण कई दिनों तक घरों में गंदा और बदबूदार पानी पहुंचता रहा। बाद में मरम्मत के बाद स्थिति सामान्य हुई।

नई लाइनें नालियों में मिलीं, कई जगह रिसाव स्मार्ट सिटी की 24 घंटे जलापूर्ति योजना के तहत करीब 16 वार्डों में नई पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। अधिकांश स्थानों पर इन्हें सड़क किनारे और नालियों से सुरक्षित दूरी पर डाला गया है। इसके बावजूद लाइनें नालियों के संपर्क में मिलीं। महामाया मंदिर वार्ड में नई पाइपलाइन में रिसाव मिला, जबकि ब्रह्मपुरी में लाइन नाली के बीच से गुजर रही है। कचना की बीएसयूपी कॉलोनी में भी कई घरों तक पानी की आपूर्ति इसी तरह की लाइन से हो रही है।

भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. विपिन दुबे, हाइड्रोलॉजिस्ट

ऐसा लीकेज हेल्थ के लिए खतरा है… नालियों से होकर गुजरने वाली पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज होने पर लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। बरसात के दौरान ऐसे रिसाव वाले हिस्सों से दूषित पानी पाइपलाइन में प्रवेश कर घरों तक पहुंच सकता है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

बारिश से पहले निगम को अकूस्टिक लीक डिटेक्टर जैसी तकनीक की मदद से सूक्ष्म ध्वनि और कंपन के आधार पर पाइपलाइन में रिसाव की पहचान कर उसकी मरम्मत करनी चाहिए। वीडियो एंडोस्कोपी जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा सकता है। साथ ही नागरिकों को भी पानी की गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है।

करीब 50% शिफ्टिंग, बाकी जगह चल रहा काम नालियों के ऊपर से गुजरने वाली पाइपलाइनों की करीब 50% शिफ्टिंग हो चुकी है। कुछ क्षेत्रों में थोड़ी दिक्कत आ रही है, लेकिन शेष क्षेत्रों में भी जलापूर्ति प्रभावित किए बिना चरणबद्ध तरीके से काम किया जाएगा।– संतोष साहू, अध्यक्ष जलकार्य विभाग नगर निगम

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