टूट रही जाति की जंजीर…:शिक्षा, शहरीकरण और नई सोच से बढ़ रहे अंतरजातीय विवाह

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छत्तीसगढ़ में विवाह को लेकर सामाजिक बदलाव की नई तस्वीर उभर रही है। विवाह के सबसे बड़ा आधार ‘जाति’ की जंजीर धीरे-धीरे टूटने लगी है। अब युवा शिक्षा, रोजगार और वैचारिक सामंजस्य को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसी का असर अंतर्जातीय विवाहों के बढ़ते आंकड़ों में दिख रहा है। पिछले छह वर्ष में प्रदेश में 4490 ऐसे विवाह हुए, जिनमें पति या पत्नी में से एक अनुसूचित जाति और दूसरा सामान्य या अन्य पिछड़ा वर्ग से है।
ऐसे विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने अब तक 112.57 करोड़ रुपए की सहायता राशि दी है। अनुसूचित जाति वर्ग के युवक या युवती से विवाह करने वाले जोड़े को 2.50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।
बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम दंपती भी हैं, जो अंतरजातीय विवाह के बाद प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन नहीं करते। नतीजा उनका रिकॉर्ड शासन तक नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार अब युवाओं के लिए जाति से ज्यादा शिक्षा, करियर, जीवनशैली और आपसी समझ का महत्व हो गया है।
नतीजा पहले जिन रिश्तों का परिवार और समाज विरोध करता था, उन्हें अब स्वीकार्यता मिलने लगी है। रायपुर, भिलाई और बिलासपुर में सबसे अधिक आवेदन आते हैं। वहीं बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा और गरियाबंद जैसे जिलों में इनकी संख्या काफी कम है।
अंतरजातीय शादी की वजह… उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ता मेलजोल। {सरकारी व निजी नौकरियों में सामाजिक मिश्रण। {सोशल मीडिया और डिजिटल संवाद । {आर्थिक आत्मनिर्भरता में वृद्धि। {युवाओं की बदलती प्राथमिकताएं। {परिवारों की बढ़ती सामाजिक स्वीकार्यता। {कानूनी संरक्षण और सरकारी प्रोत्साहन। {शहरीकरण और शिक्षा का प्रसार।
केस-1: जनवरी 2026 कोरबा निवासी अभिनव आदिले अनुसूचित जाति समुदाय से हैं। उन्होंने जांजगीर-चांपा की 20 वर्षीय सुनीता देवांगन से शादी की। सुनीता ओबीसी वर्ग से हैं। उनके इस रिश्ते को दोनों के परिवारों ने सम्मान के साथ स्वीकार किया।
केस-2: सितंबर 2025 दुर्ग निवासी दिनेश कुमार साहू ने गरियाबंद की पायल बेलदार से शादी की। पायल अनुसूचित जाति वर्ग से हैं



