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एनजीटी के नियमों की अनदेखी:सड़कों के किनारे तनों तक बिछाई कॉन्क्रीट, पेड़ों का दम घुट रहा

 

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शहर को सुंदर बनाने की कवायद में रायपुर के हजारों पेड़ों की जिंदगी पर संकट खड़ा हो गया है। प्रमुख सड़कों, चौराहों और फुटपाथों के निर्माण के दौरान पेड़ों के तनों के आसपास की जमीन को सीमेंट, कॉन्क्रीट और पेवर ब्लॉक से पूरी तरह ढंक दिया गया है।

इससे जड़ों तक प्राकृतिक रूप से हवा व बारिश का पानी पहुंचना बंद हो गया है। नतीजतन कई पेड़ कमजोर होकर सूखने लगे हैं, जबकि कई बड़े पेड़ भीतर से खोखले हो चुके हैं।

अधिकांश मुख्य मार्गों और रिहाइशी इलाकों में निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों को कॉन्क्रीट के शिकंजे में जकड़ दिया गया है, जबकि एनजीटी के निर्देशों के अनुसार किसी भी पेड़ के तने के चारों ओर कम से कम एक मीटर जमीन खुली छोड़ना अनिवार्य है, ताकि जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन और बारिश का पानी मिल सके।

इसके बावजूद नगर व पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों में इन नियमों का पालन नजर नहीं आता। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े निर्देशों की अनदेखी से शहर की हरियाली पर खतरा बढ़ रहा है और भूजल रिचार्ज भी प्रभावित हो रहा है।

इन तीन इलाकों की हालत से समझें कैसे घुट रहा है पेड़ों का दम

एक्सप्रेस-वे किनारे पेवर ब्लॉक का जाल बिछा देवेंद्र नगर एक्सप्रेस-वे के किनारे 60 पेड़ लगाए गए थे। लेकिन निर्माण कार्य के दौरान इन पेड़ों के आसपास की मिट्टी को पूरी तरह ढंकते हुए पेवर ब्लॉक का जाल बिछा दिया गया। मानसून के दौरान बारिश का पानी जमीन के अंदर रिसने के बजाय सीधे कांक्रीट की सड़क पर बह जाता है।

निर्माण कार्यों ने बंद कर दी पेड़ों की सांसें

धनलक्ष्मी नगर में मकानों और आंतरिक सड़कों के निर्माण के दौरान लापरवाही बरती है। लोगों ने अपने घरों के सामने लगे पेड़ों के चारों ओर रैंप और नाली बनाते समय पूरी तरह सीमेंट भर दिया और बचे हिस्से में पेवर ब्लॉक लगा दिए। इससे पेड़ों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।

तालाब किनारे लगे पेड़ों की हालत भी खराब

विजय नगर इलाके में तालाब के सौंदर्यीकरण के तहत चारों ओर पाथ-वे बनाया गया। इस दौरान सभी पुराने पेड़ों के तनों के ठीक ऊपर तक कॉन्क्रीट बिछा दी गई। इससे कई पेड़ नीचे से कमजोर होकर एक तरफ झुकने लगे हैं। जड़ों तक पर्याप्त नमी नहीं पहुंचने से भूमिगत संतुलन प्रभावित हो गया है।

दलदल सिवनी के स्मृति वन में इस तरह कांक्रीट से जकड़े हुए हैं पेड़।

 डॉ. मानस कांति देब, एचओडी, इंवायरमेंटल साइंस, रविवि

अब भी नहीं संभले तो सड़ेंगे पेड़, तेजी से नीचे जाएगा भूजल-स्तर

पेड़ों के ठीक चारों ओर सीमेंट, कॉन्क्रीट और पेवर ब्लॉक की मोटी परत बिछाने से बारिश का पानी जमीन के भीतर नहीं समा पाता। इससे शहर का भूजल वॉटर रिचार्जिंग पूरी तरह ठप हो जाता है और सतही जल का बहाव बढ़ जाने से सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात बनते हैं। इसके अलावा लगातार बंद रहने के कारण मिट्टी के अंदर कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और ऑक्सीजन खत्म हो जाती है।

इससे पेड़ों की जड़ें सड़ने लगती हैं। जड़ें सड़ने से पेड़ अंदर ही अंदर खोखले हो जाते हैं। बाहर से हरे दिखाई देने वाले कई पेड़ वास्तव में स्लो पॉइजनिंग का शिकार हो रहे हैं। समय रहते निगम ने इन पेड़ों के आसपास से कम से कम तीन फीट के दायरे से सीमेंट और पेवर ब्लॉक हटाने की मुहिम शुरू नहीं की तो आने वाले 2 से 3 सालों में शहर के सैकड़ों पुराने पेड़ अचानक गिरकर खत्म हो जाएंगे।

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