सुप्रीम कोर्ट ने कहा -:समझौते के बाद भी क्रिमिनल केस चलाना अर्थव्यवस्था के लिए घातक

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि यदि बैंक लोन अकाउंट का सेटलमेंट आपसी सहमति से हो चुका है और उस पर डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल यानी डीआरटी की मुहर लग चुकी है, तो उसके बाद कर्जदार के खिलाफ धोखाधड़ी का क्रिमिनल केस चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कहा कि कमर्शियल विवादों के निपटारे के बाद भी यदि आपराधिक मुकदमे चलते रहेंगे तो देश के आर्थिक सिस्टम पर इसका बुरा असर पड़ेगा और लोग बैंकों के साथ वन-टाइम सेटलमेंट करने से कतराएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने छत्तीसगढ़ के कारोबारी विजय कुमार केला की अपील स्वीकार करते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। रायपुर निवासी विजय कुमार केला के खिलाफ सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी, इस मामले में चार्जशीट भी पेश की जा चुकी थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लगाई थी। केला ने बताया कि फर्म मेसर्स मोहन ट्रेडर्स को उनके बड़े भाई स्वर्गीय परमानंद केला संभालते थे।
फर्म ने यूको बैंक से लोन लिया था, जो वर्ष 2009 तक 8 करोड़ रुपए हो गया था। इस लोन के बदले रायपुर के अमलीडीह और बोरियाखुर्द की संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। नवंबर 2009 में परमानंद केला के आकस्मिक निधन के बाद कारोबार ठप हो गया और लोन की किस्तें जमा नहीं की जा सकीं। इसके चलते 31 दिसंबर 2010 को बैंक ने इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया और बकाया लोन की वसूली के लिए डीआरटी, जबलपुर में केस पेश किया। डीआरटी में मामला लंबित रहने के दौरान दोनों पक्षों में 6.49 करोड़ रुपए के बकाया के बदले 4.25 करोड़ रुपए में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तय हुआ।
ढाई साल बाद बैंक ने सीबीआई में की शिकायत खाता बंद होने के करीब ढाई साल बाद फरवरी 2018 में यूको बैंक के जोनल हेड ने सीबीआई में लिखित शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि केला ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर लोन लिमिट बढ़वाने के लिए सीए की फर्जी ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी और कीमती संपत्तियों को मुक्त कराकर बैंक के पास एक अतिक्रमण वाली जमीन गिरवी रख दी थी।
सीबीआई ने केस दर्ज कर रायपुर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जिस पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भी रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।



