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बस्तर संभाग में चार लाख क्विंटल धान असुरक्षित पड़ा:31 जिलों में 333 करोड़ रु. का 10 लाख क्विंटल धान खुले में, बारिश से खतरा

 

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धान खरीदी खत्म हुए चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश के खरीदी केंद्रों में अब भी 10.76 लाख क्विंटल से ज्यादा धान पड़ा हुआ है। मानसून करीब है और समय पर बारिश शुरू होने की स्थिति में यह धान खराब हो सकता है। समर्थन मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 333.74 करोड़ रुपए से अधिक है।

खरीदी केंद्रों में अभी 7,48,310 क्विंटल मोटा, 1,21,020 क्विंटल पतला और 2,07,250 क्विंटल सरना धान का परिवहन बाकी है। परिवहन में लगातार हो रही देरी के कारण एक बार फिर करोड़ों रुपए के धान के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है।

साल 2025-26 में प्रदेश में कुल 14.10 करोड़ क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इसमें से 12.34 करोड़ क्विंटल धान राइस मिलर्स को और 1.65 करोड़ क्विंटल धान संग्रहण केंद्रों में भेजा गया। नियम के अनुसार 31 मार्च तक खरीदी केंद्रों से धान का पूरा उठाव हो जाना चाहिए था, लेकिन समय-सीमा बढ़ाकर 31 मई कर दी गई। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में धान अब भी केंद्रों में जमा है। अब बारिश में खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।

राजनांदगांव: 79 समितियों में 17 करोड़ के 56 हजार क्विंटल उठाव नहीं राजनांदगांव में समर्थन मूल्य पर खरीदी खत्म होने के चार माह बाद भी जिले की कुल 96 में 79 समितियों में 56 हजार क्विंटल धान का उठाव नहीं हो पाया है। इसकी कीमत 17 करोड़ रुपए है। जिले में 31 जनवरी 2025 तक समर्थन मूल्य में 62 लाख क्विंटल धान खरीदा गया। फरवरी से मई तक चार माह से धान खुले में पड़ा है।

इस बीच धान सूखता गया तो कभी बेमौसम बारिश में भीगने की वजह से खराब हुआ। केवल शहर के आसपास ढाबा, भानपुरी, गठुला, सांकरा, तुमड़ीबोड, खुर्सीटिकुल, कोलिहापुरी, तेंदूनाला, दीवानभेड़ी, कन्हारपुरी से पूरा धान उठाया गया।

बस्तर: संभाग में 141 करोड़ रुपए का धान खुले आसमान के नीचे बस्तर संभाग में खरीदी केद्रों से धान का उठाव करने के लिए प्रशासन ने 165 मिलर्स को इसकी जिम्मेदारी दी थी। पहले धान का उठाव करने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया गया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाते हुए 31 मई तक कर दिया गया। लेकिन मिलर्स की लापरवाही के चलते अब भी बस्तर संंभाग के करीब 200 केंद्रों में 4 लाख 56 हजार क्विंटल धान पड़ा हुआ है।

3100 रुपए प्रति क्विंटल के मान से खरीदे गए इस धान की कीमत 141 करोड़ रुपए है। मिलर्स के मुताबिक समय रहते धान का उठाव न होने की वजह नान के गोदाम और उनके गाेदाम में जगह की कमी और बारिश है।

15 जून तक हर हाल में मिलर्स कर लेंगे धान का उठाव जितना धान बचा है, उसका डिलीवरी ऑर्डर जारी हो चुका है। बस्तर में चूंकि एक साथ डीओ कटा इसलिए गाड़ी की भी कमी आ रही है। बस्तर के धान का उठाव करके दूसरे जिलों के मिल तक पहुंचाना होता है, इसलिए लंबी रूट की गाड़ियां नहीं मिलती। 15 जून तक हर हाल में मिलर्स की ओर से सारे धान का उठाव कर लिया जाएगा। संग्रहण केन्द्रों में लोडिंग कैपेसिटी कम होने के कारण भी उठाव में दिक्कत आती है।

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