छत्तीसगढ़प्रमुख खबरें

पापा मेरे शव को हाथ न लगाएं’, कड़वी यादों और अपमान ने छीनीं प्रियांशु की सांसें, दो पन्नों में लिखा दर्द

 

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

कानपुर में कचहरी की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने से पहले प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने दो पेज के सुसाइड लोट लिखा है कि उनकी आखिरी इच्छा है कि सुसाइड नोट जो भी देखे उसे आखिरी तक पढ़े। पिता राजेंद्र कुमार की डांट, उलाहने और निर्वस्त्र कर घर से निकालने की धमकी उन्हें जिंदगी भर सालती रही। पिता से रिश्ते में इस कदर दूरी आ गई कि उन्हें लिखना पड़ गया… ऐसे पिता भगवान किसी को भी न मिले। पिता उसका शव भी न छू पाएं… पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो।

करीब 24 वर्ष की उम्र में जान देने वाले प्रियांशु ने लिखा कि लॉ 2025 में किया है। बचपन में छह साल की उम्र में चुपके से फ्रिज में रखा मैंगोशेक पी लेने पर पिता ने निर्वस्त्र कर घर से निकाल दिया था। वह शर्मिंदगी जहन में बैठ गई। आगे लिखा कि पढ़ाई के लिए दबाव, अधूरी तैयारी पर पीटना तो फिर भी ठीक था लेकिन हर पल शक की नजर से देखना हर मिनट का हिसाब लेना, कहीं न कहीं मानसिक टार्चर ही रहा।

सबके सामने बेइज्जत करना नहीं भूलते थे पिता
टार्चर इस सीमा तक नहीं हो कि नफरत में बदल जाए। सुसाइड नोट के अनुसार पिता के कक्षा नौ में विषय के चयन से लेकर कम अंक आने पर घर से निर्वस्त्र कर निकालने की धमकी के डर से नापसंद विषय भी लेने पड़े। हाईस्कूल में अंक कम आने पर घर छोड़कर मथुरा पहुंच गया था। बचपन में चुराए गए एक रुपये के सिक्के वाली गलती को पिता सबके सामने कह कर बेइज्जत करना नहीं भूलते थे।

जीवन में जरूरत से ज्यादा दखल दी जा रही थी
पिता को घर खर्च में मदद कर सकूं, इसलिए ट्यूशन भी पढ़ाया। अपना ऑनलाइन वर्क कर पिता को मोबाइल और बहन को फोन संग स्कूटी दिलाई। इसके बावजूद पिता शारीरिक रूप से कमजाेर होने का आरोप लगाते थे। लिखा कि उनका न तो गलत शौक है न संगत। पिता खुद का घर और ऑफिस न बना पाने का ताना देते हैं। उसके पास किसका फोन आया, कहां जा रहे हो जैसी जरूरत से ज्यादा दखल उसके जीवन में दी जा रही थी।

मां और बहन को ढेर सारा प्यार देने की बात लिखी
सुसाइड नोट के अनुसार गुरुवार को भी पिता ने मोहल्ले में सबके के सामने बेइज्जत किया। ऐसे हालातों में उसकी जीने की इच्छा खत्म हो गई। लिखा कि पापा जीत गए…उन्हें जीत मुबारक हो, क्योंकि इतनी बंदिशों और बेइज्जती के साथ वह जी नहीं सकता। आगे पिता पर कोई कार्रवाई न करने की बात लिखी है। साथ ही मां और बहन को ढेर सारा प्यार देने की बात लिखी है।

ये था पूरा मामला
पिता की डांट, समाज का दबाव और जीवन में कुछ न कर पाने की हताशा ने युवा प्रशिक्षु अधिवक्ता को मौत का रास्ता चुनने पर मजबूर कर दिया। बर्रा-8 वरुण विहार के रहने वाले 24 वर्षीय प्रियांशु श्रीवास्तव ने गुरुवार को न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। उसने सुसाइड नोट में पिता राजेंद्र कुमार पर आक्रोश व्यक्त किया है। पिता से उसे इतनी नफरत थी कि उसने उन्हें शव छूने तक के लिए मना करने की बात लिखी है।

तीन घंटे पहले ही व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाया सुसाइड नोट
लिखा है कि ऐसे पिता भगवान किसी को भी न मिले। कचहरी में गुरुवार दोपहर लगभग साढ़े तीन बजे प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव के न्यायालय भवन की पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी। आनन-फानन पुलिस और कोर्ट की सुरक्षा में तैनात विशेष सुरक्षा बल के जवान प्रियांशु को उर्सला ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, घटना से लगभग तीन घंटे पहले ही घर पर हुए विवाद के बाद प्रियांशु ने दो पेज का सुसाइड नोट लिखकर अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर लगा दिया था।

सिर फट गया और मांस के लोथड़े बाहर आ गए
इसमें उसने कचहरी जाकर खुदकुशी करने की बात लिखी थी। इसके बाद परिजन प्रियांशु को तलाश रहे थे। प्रियांशु विधि स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव के साथ बैठकर वकालत का प्रशिक्षण ले रहा था। पांचवीं मंजिल से प्रियांशु जिस जगह गिरा वहां सामान्यत: किसी का आना-जाना नहीं होता है। आसपास कूड़े का ढेर है और वहां आवाजाही का रास्ता भी बंद रहता है। ऊंचाई से गिरने के कारण प्रियांशु का सिर फट गया और मांस के लोथड़े बाहर आ गए थे। चारों ओर खून ही खून बिखरा था।

छह माह पहले स्टेनोग्राफर ने की थी खुदकुशी
एक साल के अंदर कचहरी में खुदकुशी की यह दूसरी घटना है। छह माह पहले धनतेरस के दिन 18 अक्तूबर को न्यायालय भवन की छठवीं मंजिल से कूदकर सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में स्टेनोग्राफर के पद पर कार्यरत नेहा संखवार ने खुदकुशी कर ली थी।

Related Articles

Back to top button