Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
बिलासपुर। शिक्षकों के लिए हाई कोर्ट का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने शिक्षक एलबी राजेंद्र प्रसाद पटेल की याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य शासन की अपील को खारिज कर दिया है
कोर्ट ने शिक्षाकर्मी एलबी राजेंद्र की पूर्व सेवा गणना के आधार पर पेंशन के प्रकरणों का निर्धारण करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि ओपीएस में पूर्व सेवा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ओल्ड पेंशन स्कीम में शामिल करने की मांग की थी
चिरमिरी नगर निगम में पदस्थ शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर कर संविलियन से पूर्व की सेवा को ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) में शामिल करने की मांग की थी। याचिका में कहा है कि संविलियन के बाद भी उनकी पूर्व सेवा को पेंशन गणना में नहीं जोड़ा जा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है।
सरकार ने फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह पूर्व सेवा को पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने पर विचार करे। इसके लिए सरकार को 120 दिनों का समय भी दिया गया था। हालांकि, इस निर्देश पर अमल करने के बजाय राज्य सरकार ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर कर दी थी।
कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया
डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान शिक्षक राजेंद्र प्रसाद पटेल भी पक्षकार के रूप में शामिल रहे। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में हुई। राज्य सरकार ने अपने पक्ष में संविलियन की शर्तों का हवाला दिया। सरकार का तर्क था कि संविलियन के समय जो शर्तें तय की गई थीं, उसी के आधार पर पेंशन का निर्धारण किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं
डिवीजन बेंच ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि जब संविलियन के दौरान पूर्व सेवा की गणना को मान्यता दी गई है, तो फिर पुरानी पेंशन योजना में उसे शामिल करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने माना कि पूर्व सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा।