28 फरवरी तक धान खरीदी नहीं हुई तो आंदोलन और तेज होगा – देवलाल नरेटी, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, आप

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केशकाल/ कोंडागॉव। यह आंदोलन प्रदेश में धान खरीदी व्यवस्था की विफलताओं और किसानों के साथ हो रहे अन्याय के विरोध में आयोजित किया गया। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के अनेक प्रदेश एवं जिला पदाधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष देवलाल नरेटी,प्रदेश प्रवक्ता सूरज उपाध्याय संगठन मंत्री तेजेंद्र तोडे़कर, सहसंगठन मंत्री समीर खान, प्रदेश यूथ विंग इमरान खान, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ़, सहसचिव कलावती मार्को, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष मेहर सिंह वट्टी,संयुक्त सचिव जुगल किशोर बोध, बस्तर लोकसभा अध्यक्ष नरेंद्र नाग, मीडिया प्रभारी संतोष नाग, सोशल मीडिया प्रभारी *विजय प्रधान,सोनसाय नेताम, बिरजू राम सलाम, शंभू कोराम, शरबत मरकाम, दानसाय मरकाम, रैनू राम सलाम, जागेश्वर मरापी, बुधमन शोरी, परमानंद बघेल, श्रवण यादव, मानकू पोटाई, परमीत दुग्गा, सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता एवं किसान शामिल रहे ।
आप नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार योजनाबद्ध तरीके से किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर रही है। सरकार ने धान खरीदी 15 नवंबर से प्रारंभ करने की घोषणा की थी, किंतु वास्तविकता यह रही कि कई स्थानों पर खरीदी 17, 18 और कहीं-कहीं 25 नवंबर से शुरू हुई। अब सरकार 31 जनवरी को धान खरीदी बंद कर रही है, जबकि पहले स्वयं 31 जनवरी तक खरीदी का आश्वासन दिया गया था। यह सरकार की कथनी-करनी का स्पष्ट विरोधाभास है।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार साजिश के तहत लाखों छोटे किसानों से जबरन रकबा समर्पण करवा रही है। आज भी बड़ी संख्या में किसानों को न ऑनलाइन और न ही ऑफलाइन टोकन प्राप्त हुआ है। छोटे किसानों को एक, मध्यम किसानों को दो और बड़े किसानों को तीन टोकन दिए गए, इसके बावजूद किसान अपनी पूरी फसल बेचने में असमर्थ हैं। प्रतिदिन की खरीदी सीमा कम कर दिए जाने से किसान केवल कतारों में खड़े रहकर परेशान हो रहे हैं।
पार्टी नेताओं ने भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि पटवारी, आरआई और तहसीलदार किसानों के घर जाकर धान की जांच कर रहे हैं, जिससे किसानों का अपमान हो रहा है। क्या सरकार की दृष्टि में किसान चोर हैं? बीज, खाद और उर्वरक की कमी के बाद अब एग्रीस्टेक की खामियों का हवाला देकर पहले ही लाखों किसानों का रकबा काट दिया गया। इससे स्पष्ट है कि सरकार की धान खरीदने की मंशा ही नहीं है।
आम आदमी पार्टी ने दावा किया कि प्रदेश में लगभग 15 प्रतिशत किसान धान बेचने से वंचित रह गए हैं। खेती के लिए लिया गया कर्ज चुकाने का कोई रास्ता न बचने से किसान आत्मघाती कदम उठाने को विवश हो रहे हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विष्णु देव साय सरकार की है।
नेताओं ने यह भी कहा कि प्रदेश मंत्रिमंडल के अधिकांश मंत्री किसान परिवार से होने के बावजूद किसानों की उपेक्षा की जा रही है। कांग्रेस भी किसानों के मुद्दे पर मजबूत आवाज नहीं उठा पा रही है। सरकारी समितियों में भ्रष्टाचार चरम पर है, लाखों क्विंटल धान के नुकसान के मामलों में आज तक किसी अधिकारी पर एफआईआर नहीं हुई। यह सरकार किसान हितैषी नहीं, बल्कि किसान विरोधी सरकार है।
आम आदमी पार्टी ने सरकार से स्पष्ट मांग की कि—
किसानों से जबरन रकबा समर्पण कराना तत्काल बंद किया जाए।
टोकन के नाम पर भौतिक सत्यापन कर किसानों को अपमानित करना बंद किया जाए।
सभी किसानों को समुचित एवं पारदर्शी टोकन व्यवस्था प्रदान की जाए।
धान खरीदी की तिथि 28 फरवरी 2026 तक बढ़ाई जाए, ताकि प्रदेश का अन्नदाता अपनी पूरी फसल बेच सके।
आज सैकड़ों कार्यकर्ताओं और किसानों की उपस्थिति में किए गए इस चक्का जाम के माध्यम से आम आदमी पार्टी ने डबल इंजन की सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।



