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जिस पोटाली स्वास्थ्य केंद्र को माओवादियों ने 20 वर्षों तक शुरू नहीं होने दिया, वो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल बना

 

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 रायपुर। कभी माआवोदी हिंसा और भय की पहचान रहा दंतेवाड़ा जिले का पोटाली आज विकास, भरोसे और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मिसाल बन चुका है। यहां कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, लेकिन अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की गारंटी बनकर खड़ा है।

पोटाली का यह परिवर्तन माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में विकास की जीत की कहानी है। करीब डेढ़ दशक तक माओवादी हिंसा और असुरक्षा के कारण बंद पड़ा उप-स्वास्थ्य केंद्र (एसएचसी) स्थानीय लोगों के लिए एक अधूरा सपना था।

पैदल चलकर दंतेवाड़ा जाना मजबूरी थी

साधारण दवा के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा जाना मजबूरी थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। एसएचसी पोटाली के भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। माओवादियों के तीव्र विरोध और भय के चलते भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया।
ग्रामीणों के अनुरोध पर वर्ष 2022 में भवन निर्माण का कार्य दोबारा शुरू हुआ। 26 अप्रैल 2023 को अरनपुर क्षेत्र के पास हुई माओवादी घटना के बाद निर्माण कार्य फिर ठप हो गया। इस घटना में वाहन चालक समेत 10 डीआरजी जवान बलिदान हुए थे।
ग्रामीणों से संवाद और जिला प्रशासन के आश्वासन के बाद नवंबर 2023 में कार्य फिर से शुरू हुआ। निर्माण कार्य में सक्रिय तत्कालीन जनपद सदस्य की माओवादियों ने 26 अप्रैल 2024 को हत्या कर दी, जिससे परियोजना एक बार फिर ठप हो गई।

12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं

आयुष्मान आरोग्य मंदिर से 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएं, शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, किशोर स्वास्थ्य, गैर संचारी रोगों की जांच व इलाज, संचारी रोगों की रोकथाम, मानसिक और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। 9 जनवरी 2026 को इसे एनक्यूएएस प्रमाण पत्र मिला।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर में चार कर्मचारी पदस्थ

कुआंकोड़ा विकासखंड के अंतर्गत संचालित पोटाली आयुष्मान आरोग्य मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां चार कर्मचारी पदस्थ हैं, जिनमें एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, दो महिला ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और एक पुरुष ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक शामिल हैं।

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