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दिवाली के दिन बोकारो में दिवाली पर पटाखा बाजार में आग, 55 दुकानें जलकर खाक

सच तक इंडिया रायपुर बोकारो। झारखंड के बोकारो जिले में दीवाली के मौके पर एक दुखद घटना सामने आई है, जब पटाखों के बाजार में अचानक आग लग गई। यह घटना BS सिटी थाना क्षेत्र के गरमा नदी किनारे स्थित पटाखा बाजार में हुई, जहां लोग दीवाली के लिए पटाखे खरीदने आए थे। बाजार में मौजूद दुकानों में से करीब 66 में आग लग गई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 50 दुकानें पूरी तरह से जलकर खाक हो गईं

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घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में आग ने भीषण रूप धारण कर लिया। बाजार में धमाकेदार पटाखों की आवाज सुनाई देने लगी, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। इस दौरान, कुछ लोगों ने मौके का फायदा उठाते हुए दुकानों में लूटपाट भी शुरू कर दी। लुटेरों ने न केवल पटाखों को लूटने का प्रयास किया, बल्कि दुकानों में रखे पैसे भी चुरा लिए।

आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई और आग बुझाने की कोशिश की। फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने कई घंटों तक मेहनत की, लेकिन आग पर काबू पाना आसान नहीं था। आग की तीव्रता और गर्मी के कारण आसपास के अन्य दुकानदारों और खरीदारों में भी डर और चिंता का माहौल था। इस स्थिति ने न केवल बाजार में खरीददारी करने वालों को प्रभावित किया, बल्कि आसपास के निवासियों को भी दहशत में डाल दिया।

यह ध्यान देने योग्य है कि इस पटाखा बाजार की स्थापना जिला प्रशासन की अनुमति से की गई थी, लेकिन सुरक्षा की व्यवस्था में भारी कमी थी। गरमा पुल के पास स्थित खाली जगह पर हर साल दीवाली के मौके पर पटाखों की दुकानें लगाई जाती हैं, लेकिन पिछले वर्षों में सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गई है। बाजार में आग की घटना ने सुरक्षा प्रबंधन की गंभीर खामियों को उजागर किया है।

जिला प्रशासन अब इस मामले की गंभीरता को समझते हुए उचित कदम उठाने की योजना बना रहा है। उन्हें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अगले साल पटाखा बाजार में सुरक्षा की सभी आवश्यक व्यवस्था की जाए ताकि ऐसी घटनाएं न हों। प्रशासन को दुकानदारों और खरीदारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए और पटाखा बाजार के लिए उचित स्थान और सुरक्षा उपायों पर ध्यान देना चाहिए। इस घटना ने दीवाली के त्योहार की खुशियों को मातम में बदल दिया है। लोगों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल वित्तीय नुकसान होता है, बल्कि मनोबल पर भी असर पड़ता है। अब बोकारो के लोग इस घटना के बाद सुरक्षा की नई उम्मीदों के साथ आगामी त्योहारों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी दुखद घटना न हो।

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