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रायपुर DEO ऑफिस आगकांड: पहले आग, फिर जांच से पहले चला बुलडोजर, अब नई बिल्डिंग की तैयारी! शक के घेरे में सिस्टम

रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में लगी आग अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक गंभीर साजिश की शक्ल लेती दिख रही है. आग लगने के बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना दिया है. जांच से पहले ही DEO ऑफिस की बिल्डिंग और स्टोर रूम को तोड़ दिया गया. सवाल साफ है जब जांच शुरू ही नहीं हुई थी, तो सबूत क्यों मिटाए गए?
जांच से पहले ही तोड़ दी गई बिल्डिंग, क्यों?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आगजनी की जांच के लिए समिति बनाई गई, लेकिन जांच कमेटी के मौके पर पहुंचने से पहले ही पूरी बिल्डिंग को गिरा दिया गया. जिन कमरों में फाइलें थीं, वही सबसे पहले तोड़े गए. अब सवाल उठ रहा है कि कौन से ऐसे सबूत थे, जिन्हें बचाने के बजाय मिटाना जरूरी समझा गया?
कांग्रेस का आरोप भ्रष्टाचार छुपाने की साजिश
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को सीधे-सीधे भ्रष्टाचार से जोड़ दिया है. पार्टी का कहना है कि DEO ऑफिस में जो दस्तावेज जले हैं, उनमें वित्तीय लेनदेन और नियुक्तियों से जुड़ी अहम फाइलें शामिल थीं. आग को हादसा नहीं बल्कि जानबूझकर रची गई साजिश बताया जा रहा है.
पीसीसी चीफ दीपक बैज का बड़ा बयान
इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह आग सामान्य नहीं थी. उनका आरोप है कि पहले सबूत जलाए गए और अब आगजनी को छुपाने के लिए बिल्डिंग गिरा दी गई. बैज ने साफ कहा कि यह पूरा मामला भ्रष्टाचार छुपाने की कोशिश की ओर इशारा करता है.

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