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नाराज किसानों ने राज्यपाल व मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

रायपुर।  संयुक्त किसान मोर्चा छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से मुलाक़ात कर किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए समय माँगा था परन्तु समय नहीं मिलने से नाराज किसानों ने उनके कार्यालय में ज्ञापन देकर अपनी मांगो पर शीघ्र कार्यवाही की मांग किया है.ज्ञापन सौंपने वाले में तेजराम विद्रोही प्रदेश महासचिव भारतीय किसान यूनियन (टिकैत), जनक लाल ठाकुर पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, सौरा यादव संयोजक आदिवासी भारत महासभा, नरोत्तम शर्मा अध्यक्ष छत्तीसगढ़ किसान महासभा, गैंद सिंह ठाकुर अध्यक्ष जिला किसान संघ बालोद, कल्याण पटेल क्रन्तिकारी किसान यूनियन, मदन लाल साहू गरियाबंद जिला अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन, नवाब जिलानी, मनोज कुमार साहू, प्यारी राम साहू, संतु बढ़ाई आदि उपस्थित रहे. किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को हल्के में ले रही है जिसके कारण राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने 6 से 10 नवंबर के बीच मुलाक़ात के लिए एक दिन भी समय नहीं दे पाया। फिर भी हम ज्ञापन के माध्यम से उन्हें अवगत कराना चाहते हैं कि किसानों की निम्नलिखित मांगो पर शीघ्र ही कार्यवाही किया जाए अन्यथा प्रदेश व्यापी आंदोलन के लिए संयुक्त किसान मोर्चा बाध्य होंगे। मांगे इस प्रकार है–

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1. सी 2+ 50 प्रतिशत फार्मूला के आधार पर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी लागू किया जाए और उस पर खरीद सुनिश्चित की जाए। केन्द्र सरकार द्वारा धान पर बढ़ायी गयी न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ छत्तीसगढ़ के किसानों को दिया जाना चाहिए। साल 2023 में छत्तीसगढ़ राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद 3100 रुपये प्रति क्विंटल पर धान खरीदी की घोषणा के अनुरुप किसानों को समर्थन मूल्य मिला लेकिन खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में केन्द्र द्वारा धान पर 117 रुपया प्रति क्विंटल की वृध्दि की गई थी जिसका लाभ किसानों को 3217रु. प्रति क्विंटल की दर से मिलना था जो नहीं मिला अब खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए केन्द्र द्वारा धान पर 69 रुपये प्रति क्विंटल की वृध्दि की गई है जिसे राज्य सरकार किसानों को देने के पक्ष में नहीं है ऐसा महसूस हो रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी कह रहे हैं कि हमने 3100रु. में धान खरीदेंगे कहा था और 3100रु. मे धान खरीदेगे। यह छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ सरासर अन्याय है जबकि किसानों को खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान पर 3286रु. प्रति क्विंटल का दाम एकमुस्त मिलना चाहिए क्योंकि वृध्दि का लाभ नहीं मिलने से 186रु. प्रति क्विंटल अर्थात् 3906रु. प्रति एकड़ का सीधा नुकसान किसानों को होगा।
2. एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन से वंचित हैं ऐसे वंचित किसानों का पूर्व वर्ष की पंजीयन के आधार पर फसल की खरीदी किया जाये। साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना का बकाया एक किस्त किसानों को भुगतान किया जाये।
3. बिजली बिल हाफ योजना को पुनः लागू किया जाये। बिजली क्षेत्र का निजीकरण रद्द कर स्मार्ट मीटर को बाहर किया जाये। लंबित बिजली बिलों को माफ किया जाए । ग्रामीण इलाकों को प्रति दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो, जिसमें सिंचाई के लिए पंप सेट शामिल हों। ग्रामीण उपभोक्ताओं पर आरोप लगाकर बिजली बिलों को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया है जिससे उन्हें बकाया का दोषी ठहराया जा सके। ग्रामीण जनता को कार्पोरेट समर्थित, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नीतियों के कारण आय और रोजगार के गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। बिजली क्षेत्र में घाटा महंगी दरों पर निजी उत्पादकों से बिजली खरीदने और निजी वितरकों को सब्सिडी देकर सस्ती आपूर्ति के कारण हो रहा है, जो मुनाफा तो कमाते हैं पर सरकार को भुगतान नहीं करते। सरकारी विभागों ने भी अपने बिल जमा नहीं किये हैं।
4. युक्तियुक्तकरण के नाम पर प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों को बंद करने की नीति नहीं चाहिए भाजपा सरकार 50 से कम छात्रों वाले प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों को मर्ज करके बंद कर रही है। यह स्कूल की जमीन और संपत्ति को निजी स्वामित्व में बेचने की योजना है। इस योजना से स्कूलों की दूरी बढ़ेगी। स्कूलों में कम उपस्थिति का कारण शिक्षा की बदहाल स्थिति, अंग्रेजी मीडियम ना होना और शिक्षकों की कमी है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सरकार फीस प्रतिपूर्ति देकर निजी स्कूलों को बढ़ावा दे रही है और सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है।
5. काॅरपोरेट हीत में किये जा रहे जल, जंगल, जमीन और पर्यावरणीय क्षति को रोका जाये छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासी बाहुल राज्य है जो वन एवं खनिज संपदा से परिपूर्ण हैं परंतु पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद से काॅरपोरेट घरानों खासकर अडाणी के हित में जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। करीब 170,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हसदेव अरण्य मध्य भारत में बहुत घने जंगलों के सबसे बड़े सन्निहित वन क्षेत्रों में से एक है। छत्तीसगढ़ की फेफड़ा कहे जाने वाले ये जंगल जैव विविधता से समृध्द है तथा छत्तीसगढ़ की जीवन दायिनी नदी हसदेव और मिनीमाता बांगों बांध के केचमेंट है जिससे करीब चार लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित होती है। भारतीय वन्य जीव स्ंास्थान ने संपूर्ण हसदेव अरण्य क्षेत्र में खनन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करते हुए कहा है कि यदि खनन की अनुमति दी गई तो मानव-हाथी संघर्ष विकराल रुप ले लेगी, पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर दुस्प्रभाव पड़ेगा। इसे ध्यान में रखते हुए हसदेव अरण्य क्षेत्र के खनन हेतु जारी सभी अनुबंध रद्द किया जाये। अदानी- अंबानी जैसे किसी भी काॅरपोरेट समूहों को जमीन अथवा वन सम्पदा को न दिया जाये। जल, जंगल, जमीन एवं पर्यावरण को नुकसान तथा आदिवासियों को रहवास से बेदखल करने वाली सभी परियोजनाओं पर रोक लगायी जाए।
6. वर्तमान खरीफ सीजन में कीट प्रकोप एवं बेमौसम बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मूल्यांकन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत् किसान के खेत को इकाई मानकर किया जाये क्योंकि बीमा की राशि किसानों के खेत की रकबा के अनुसार ली जाती है परंतु नुकसान का मूल्यांकन ग्राम में हुए नुकसान की प्रतिशत के आधार पर किया जाता है जो कि दोषपूर्ण मूल्यांकन है। इसलिए ग्राम को इकाई न मानकर प्रभावित किसान के खेत को इकाई माना जाये तथा फसल क्षतिपूर्ति प्रदान किया जाये।
7. बिना किसान किताब के तुरंत रजिस्ट्री एवं नामांतरण करने संबंधी आदेश को प्रभाव से रद्द किया जाये क्योंकि इससे भू-माफिया सक्रीय होंगे और किसानों के साथ धोखाधड़ी बढ़ेगी। कम पढ़े लिखे और ग्रामीण किसान अपने जमीन से वंचित हो जायेंगे।
8. छत्तीसगढ़ की खेती को बढ़ावा देने बारहमासी सिंचाई योजना पर काम किया जाये।
9. पाचवी व छठी अनुचूचि क्षेत्रों में पेसा कानून का पालन किया जाये। वन क्षेत्र में रह रहे आदिवासी एवं गैर आदिवायिों को वन अधिकार पट्टा प्रदान किया जाये।
10. सहकारिता क्षेत्र के कर्मचारियों की सभी जायज मांगों को पूरा किया जाये।

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