बालको चिमनी हादसे की सुनवाई मई 2026 तक पूरी करने के निर्देश हाई कोर्ट बिलासपुर ने दिए हैं

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कोरबा। बालको चिमनी हादसे की सुनवाई मई 2026 तक पूरी करने के निर्देश हाई कोर्ट बिलासपुर ने दिए हैं। इसके साथ ही कोरबा के विशेष न्यायालय में चल रहे इस मामले की गवाही की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पिछले एक सप्ताह से लगातार सुनवाई चल रही।

16 साल पहले जमानत मिली
सेपको कंपनी के तीन चीनी अधिकारियों को 16 साल पहले जमानत मिली और उसके बाद से अब तक कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं। बैंक गारंटी की तीन करोड़ रुपये की राशि भी शासन के राजस्व कोष में जमा कर लिया गया था। उधर सुप्रीम कोर्ट ने सभी चीनी आरोपितों को फिर से सक्षम जमानत की नवीन बैंक गारंटी जमा करने कहा है।
क्या है मामला
23 सितंबर वर्ष 2009 में भारत एल्यूमिनियम कंपनी (बालको) 1200 मेगावाट बिजली संयंत्र की करीब 275 मीटर ऊंची चिमनी निर्माण के दौरान भरभरा कर गिर गई थी। इस दौरान कार्य में लगे 40 मजदूरों की मलबे में दब जाने से मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में गैर इरादतन हत्या का अपराध पंजीबद्ध कर 17 आरोपित बनाए गए थे।
चिमनी निर्माण का काम चीन की सेपको कंपनी को दिया गया था। आरोपितों में चीनी नागरिकता के तीन अधिकारी वू चुनान, लियू गेक्सन और वांग वेगिंग भी शामिल थे। पुलिस ने सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की थी और सुप्रीम कोर्ट से चीनी नागरिकों को सशर्त जमानत दी थी। प्रत्येक आरोपित को एक-एक करोड़ की बैंक गारंटी पर चीन जाने की अनुमति दी गई थी।
वापस लौट कर दोबारा नहीं आए
भारत से वर्ष 2010 में अपने स्वदेश चीनी अधिकारी लौटे, फिर वापस लौट कर दोबारा नहीं आए। सात फरवरी 2026 को चीनी अधिकारियों को कोरबा के विशेष न्यायालय में उपस्थित होने कहा गया था, लेकिन उन्होंने अपने वकील के माध्यम से चीन से भारत की सीधी उड़ान नहीं होने और वीजा और अनुमति नही मिलने का कानूनी पेंच फंसाते हुए उपस्थित होने में असमर्थता जाहिर कर दी।
यहां बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक के बालको शाखा में बैंक गारंटी की राशि को राजकोष में जमा करा दिया है। साथ ही जल्द ही नवीन बैंक गारंटी प्रस्तुत करने कहा है।
इस मामले की सुनवाई अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। हाईकोर्ट बिलासपुर ने विशेष न्यायालय में लंबित इस आपराधिक प्रकरण को लेकर छह माह के अंदर सुनवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें एक माह गुजर चुका है। इसके साथ निचली अदालत में प्रक्रिया तेज कर दी गई है। पिछले एक सप्ताह से लगातार इस मामले की सुनवाई हो रही।
ये भी नहीं आ रहे कोर्ट में
चीनी अधिकारियों के साथ जीडीसीएल और बालको से जुड़े अधिकारी अनुप महापात्र, बिपुल मेहता, दीपक नारंग, मनोज शर्मा, अनिल-अनिलकुमार तोमर, आलोक शर्मा, सुनील कुमार सिंह, वासु सटेड़ी (टेकरेवाल), एमएम अली, राजेश कुमार गोस्वामी सहित कुल 17 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है। एक आरोपित उपेंद्र मण्डल की मृत्यु हो चुकी है। जबकि शक्तिपाल, संजय देव तथा विकास भारत को पूर्व में फरार घोषित किया गया था। इनमें भी कई अधिकारी अलग-अलग तर्क देकर न्यायालय में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इस लगातार अनुपस्थिति को लेकर अभियोजन पक्ष ने आपत्ति भी दर्ज कराई है।
नजदीक के न्यायालय से वीडियो कांफ्रेंस से साक्ष्य कथन
विशेष कोर्ट ने कहा है कि साक्षी एसएन मेहरोत्रा को 23 फरवरी को कोर्ट में उपस्थित होने कहा है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि समंस पर टीप अंकित किया जाए, ताकि साक्षी को अपने नजदीकी जिला न्यायालय में उपस्थित होकर वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से साक्ष्य कथन करें। एक दिन पहले न्यायालय के रीडर या कोर्ट मोहर्रिर को फोन पर इसकी सूचना देकर नंबर उनके समंस पर अंकित किया जाए।



