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दहेज के सामान्य आरोपों पर ससुराल वालों को राहत, छत्तीसगढ़ HC ने रद्द की FIR

 

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक महिला द्वारा अपने पूर्व पति और ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज कराई गई प्रताड़ना और दहेज की FIR को खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि दहेज उत्पीड़न के “सामान्य और अस्पष्ट” आरोपों के आधार पर ससुराल पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती.

अदालत ने इस बात पर गौर किया कि दंपति ने शादी के बाद बमुश्किल दो महीने साथ बिताए थे और 2017 से वे अलग रह रहे थे.

मामले के अनुसार, 2016 में हुई इस शादी के बाद पति ने पत्नी के व्यवहार से परेशान होकर 2018 में तलाक की अर्जी दी थी, जिसे 2022 में फैमिली कोर्ट ने पत्नी द्वारा की गई क्रूरता के आधार पर मंजूर कर लिया था.

पति की ओर से यह भी दलील दी गई कि पत्नी के आचरण के कारण वह मानसिक तनाव का शिकार हुआ और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था.

कोर्ट ने पाया कि पत्नी ने 2021 में दर्ज कराई गई अपनी शिकायत में घटना की तारीख या स्थान का कोई विशिष्ट विवरण नहीं दिया था और आरोप पूरी तरह सामान्य थे. अदालत ने यह भी माना कि चूंकि तलाक पहले ही हो चुका है और पत्नी ने उस फैसले के खिलाफ कोई अपील भी नहीं की थी, इसलिए अब क्रूरता के आरोपों में मुकदमा चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा.

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