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इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर हाई कोर्ट सख्त कहा- हमारा सरोकार सिर्फ जनसुविधा से

 

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 इंदौर। इंदौर शहर में बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना या नहीं बनाना, यह पूरी तरह से शासन का नीतिगत निर्णय है और न्यायालय ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

कोर्ट ने कहा कि हमारा सरोकार केवल जनता की सुविधा से है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में यह बात आई कि एलिवेटेड कॉरिडोर उसी मार्ग पर प्रस्तावित है, जहां वर्तमान में बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) संचालित हो रहा है। चूंकि बीआरटीएस को लेकर पहले से ही एक याचिका न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए युगलपीठ ने निर्णय लिया कि अब बीआरटीएस और एलिवेटेड कॉरिडोर, इन दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की जाएगी।

30 लाख रुपये की राशि खर्च हुई थी

इसके लिए अगली तारीख 25 फरवरी तय की गई है। याचिकाकर्ता अतुल सेठ की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट अभिनव धनोडकर ने कोर्ट को बताया कि इस प्रोजेक्ट को लेकर पूर्व में दो बार सर्वे किए जा चुके हैं, जिन पर करीब 30 लाख रुपये की राशि खर्च हुई थी।

उन दोनों सर्वे रिपोर्ट में एलिवेटेड कॉरिडोर की उपयोगिता को नकार दिया गया था, जिसके बाद शासन ने स्वयं इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। इसके बाद भी अब एक बार फिर बिना किसी ठोस आधार के शासन इसे बनाने जा रहा है। धरातल पर इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इस पर कोर्ट ने दोहराया कि निर्माण का फैसला शासन का है, न्यायालय केवल जनहित और सुविधा के पहलुओं पर विचार करेगा।

वित्तीय पक्ष पर भी सवाल

याचिका में एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट के वित्तीय पक्ष को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया है कि प्रोजेक्ट में नगर निगम और बिजली कंपनी से जुड़े खर्चों को लेकर कोई व्यवस्था नहीं दी गई है। न ही इन खर्चों को लेकर अब तक किसी तरह का कोई सर्वे किया गया है।

निष्पक्ष मूल्यांकन की मांग

याचिका के मुताबिक, प्रोजेक्ट को लेकर कहा जा रहा है कि इससे 60 प्रतिशत यातायात को लाभ होगा, लेकिन ऐसा कोई सर्वे आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह सर्वे किसने और किस आधार पर किया किसी को नहीं पता। याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट की निगरानी में इस प्रोजेक्ट की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे करवाया जाए।

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