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केशव कृष्ण कन्हाई के गुणगान कर मन मेरे- राष्ट्रीय कवि संगम का भक्तिमय कवि सम्मेलन

भक्ति रस का पान कर आनंदित होते रहे भक्तजन

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रायपुर   श्रीमद् भागवत महापुराण के शुभ अवसर पर सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम,को देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के पावन सानिध्य में राष्ट्रीय कवि संगम के कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से भक्तिरस की अद्भुत धारा प्रवाहित कर भक्तजनों को भाव विभोर कर दिया।
महापुराण कथा के मुख्य संयोजक और राष्ट्रीय कवि संगम के प्रदेश अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने बताया कि‌ संस्था के राष्ट्रीय महामंत्री महेश शर्मा के मार्गदर्शन में प्रदेश महामंत्री उर्मिला देवी उर्मि‌ के साथ‌ सभी कवियों द्वारा प्रस्तुत कविताओं से भक्त जनों के भगवत भक्तिभाव में अदभुत वृद्धि दिखाई दी। भक्तजन
युवा कवि आरव शुक्ला की प्रस्तुति–मिटाइए पाप मेरे, और तम के अंधेरे,
माधव मुझे भी सतमार्ग दिखलाइए ।उर्मिला देवी उर्मि के भक्ति पद -श्री केशव कृष्ण कन्हाई के गुणगान कर मन मेरे/ कट जाएं भव बंधन तेरे।

विवेक भट्ट की पंक्तियों
मानवता और प्रभुता दोनों को ढोना आसान नहीं,
ईश्वर होना बहुत कठिन, मानव होना आसान नहीं।।
अनिलराय भारत की रचना- नीलकंठ शंकर जगत उपकारी है/
तारा कितनों को तूने अब मेरी बारी है.
और कवयित्री पंखुरी मिश्रा की पंक्तियों- राघवेंद्र रघुपति,राघव हैं नाम सब,उनके जो दुनिया में,प्रेम बन छाए हैं तथा महेश शर्मा और भावेश देशमुख के भक्ति पदों से भक्ति रस का पान करते रहे और आनंदित होते रहे।
भावेश देशमुख के सफल संचालन में तालियों की हर्ष ध्वनि के बीच बांके बिहारी की जय, राधा रानी की जय आदि जयकारों से स्टेडियम गुंजित होता रहा।
विश्व मंगल की भावना के साथ कवि सम्मेलन का समापन हुआ।

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