दुर्ग में अतिथि शिक्षकों का अनिश्चतकालीन हड़ताल:बोले- 20 हजार मानदेय में नहीं चल रहा परिवार, संविलियन और समान वेतन मिले

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छत्तीसगढ़ के राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी लंबित मांगों को लेकर 1 जुलाई से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर हजारों शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र दुर्ग में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।

शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 10 सालों से प्रदेश के आदिवासी और दूर-दराज के शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित शिक्षकों के समान सुविधाएं मिल रही हैं और न ही सम्मानजनक वेतन। उनका आरोप है कि सरकार ने अब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया है, जिसके चलते उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
संघ बोला- काम एक जैसा, तो वेतन कम क्यों
संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य अतिथि शिक्षक नियमित व्याख्याताओं की तरह ही विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं, लेकिन उन्हें केवल 20 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है। यह मानदेय भी साल में केवल 10 महीने के लिए दिया जाता है। इसके विपरीत नियमित शिक्षकों को कई गुना अधिक वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य सरकारी सुविधाएं मिलती हैं।
शिक्षकों का कहना है कि जब उनका कार्य नियमित शिक्षकों के समान है, तो वेतन और सुविधाओं में इतना बड़ा अंतर क्यों रखा गया है। उनका आरोप है कि हर नए शैक्षणिक सत्र में उन्हें दोबारा नियुक्ति का इंतजार करना पड़ता है, जिससे नौकरी को लेकर हमेशा असमंजस की स्थिति बनी रहती है। उनका कहना है कि इस अनिश्चितता के कारण प्रदेश के हजारों शिक्षक और उनके परिवार आर्थिक तथा मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
छुट्टियों का भी नहीं मिल रहा लाभ
संघ का कहना है कि 10 सालों की सेवा के बावजूद राज्य अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय नहीं दिया जाता। इसके अलावा नियमित अवकाश, मातृत्व अवकाश और पितृत्व अवकाश जैसी सुविधाओं का भी उन्हें पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से इन मांगों को सरकार के सामने उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि विधानसभा और विभागीय बैठकों में भी राज्य अतिथि शिक्षकों के मुद्दे कई बार उठाए जा चुके हैं। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान ‘मोदी की गारंटी’ के तहत राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) के संविलियन या समायोजन का वादा किया गया था। हालांकि सरकार बनने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस फैसला नहीं होने से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।



