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बदला सुरक्षा का पैटर्न…:शांत हुए 7 जिलों से एसआईबी वापस; अब जंगल नहीं, सोशल मीडिया और ‘अर्बन नक्सल नेटवर्क’ पर नजर

 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के लगभग सफाए के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी बदलने लगी है। इसका सबसे बड़ा असर स्टेट इंटेलिजेंस ब्यूरो (एसआईबी) पर दिखाई दे रहा है। राज्य के नक्सल प्रभावित 16 जिलों में से 7 जिलों से खुफिया तंत्र को हटा लिया गया है। इन जिलों से एसआईबी की खुफिया टीमों को वापस बुला लिया गया है।

इन जिलों में तैनात जवानों और अफसरों को उनकी मूल पोस्टिंग में भेज दिया गया है। इस बड़े फैसले से शासन के उन दावों पर भी आधिकारिक मुहर लग गई है कि इन 7 जिलों में अब नक्सली मूवमेंट का खतरा पूरी तरह समाप्त हो चुका है। बता दें खुफिया तंत्र में करीब 200 जवान तैनात थे। उनमें से 140 को वापस बुला लिया गया है।

अब हालात बदलने के साथ एसआईबी की जिम्मेदारी भी बदल चुकी है। एजेंसी का फोकस अब जंगलों के सशस्त्र दस्तों से हटकर पूरी तरह काउंटर इंटेलिजेंस पर आ गया है। इसके तहत एसआईबी की टीम अब शहरों में सक्रिय बड़े संदिग्ध नक्सलियों (ओवर ग्राउंड नेटवर्क) और दूसरे राज्यों में फैले ‘अर्बन नक्सल नेटवर्क’ की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है।

हालांकि, अभी बस्तर संभाग के सात जिले, गरियाबंद और मोहला-मानपुर में अभी खुफिया तंत्र बना रहेगा, क्योंकि ये दूसरे राज्यों की सीमा से लगे हैं। वहां नक्सली मूवमेंट रहा है और पूरी तरह सफाए की घोषणा नहीं हुई है।

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