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सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव पुस्तक विमोचन , सम्मान एवं विचार मंथन के साथ संपन्न

भाषा अस्मिता अकादमी और छत्तीसगढ़ मित्र, भारत का आयोजन सिंगापुर की धरती पर

 

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रायपुर  भारतीय ज्ञान परंपरा का विश्व को प्रदेय ,, विषय पर आधारित सिंगापुर साहित्य महोत्सव ‌में शिवम रेस्टोरेंट, लिटिल इंडिया ,सिंगापुर के भव्य सभागार में 16 जून को आयोजित मुख्य समारोह का शुभारंभ सिंगापुर की हिंदी लेखिका सुश्री नीतू गुजराल के मुख्य आतिथ्य और अंतरराष्ट्रीय कॉमेंटेटर जसवंत क्लाडियस की अध्यक्षता में रायपुर की साहित्यकार उर्मिला देवी उर्मि द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना और ज्योत्स्ना सक्सेना की अगुवाई में सहज योग से हुआ।
संयोजक भाषा अस्मिता अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुधीर शर्मा ने सभी का आत्मीय स्वागत किया।
इस अन्तर्राष्ट्रीय समारोह में सिंगापुर आगे बढ़ो ( साझा संकलन), छत्तीसगढ़ का अनचीन्हा संगीतमय अतीत ‌( डॉ अर्चना पाठक), कुकड़ू कूं ,,और झंकृत ‌निनाद (ज्योत्स्ना सक्सेना )‌गुरु‌ घासीदास ‌ (. डॉ ‌आर के सुखदेवे ) छत्तीसगढ़ मित्र का नवीनतम अंक , श्री हिंगुलाज चालीसा (उर्मिला देवी उर्मि )‌ आदि ‌पुस्तकों का विमोचन ‌हुआ।
कनाडा ‌से पधारे सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री‌‌ रमेश‌‌ चंद्र गुजराल‌ ने इस अन्तर्राष्ट्रीय महोत्सव को‌ हिन्दी के‌‌ वैश्विक ‌प्रसार के‌ लिए‌ अत्यंत महत्वपूर्ण ‌निरूपित किया।

उर्मिला‌ देवी उर्मि के प्रभावशाली‌ संचालन में वीरेंद्र शर्मा ,‌ डॉ अर्चना पाठक , डॉ सीमा अवस्थी , ,सुनीला‌ गेरा‌ ,डॉ ‌तृषा शर्मा , नीतू गुजराल, आभा‌ शर्मा , सुनीला गेरा ने कविताओं से समाजोपयोगी संदेश दिया । डॉ ‌तृषा‌ शर्मा , जसवंत क्लाडियस , उर्मिला देवी, बी पी‌ पारकर ने आलेख वाचन किया।

विद्वान लेखकों जसवंत ‌क्लाडियस को मार्क टुली सम्मान,‌शीलकांत पाठक को‌ श्रीकांत वर्मा सम्मान, डॉ ‌आर के ‌सुखदेवे को नागार्जुन सम्मान, बी‌ पी‌ पारकर‌ को इंद्रु‌ केंवट सम्मान और विदुषी लेखिकाओं डॉ अर्चना पाठक को अनीता ‌सेन सम्मान, ज्योत्स्ना सक्सेना को सुभद्रा कुमारी चौहान सम्मान , सीमा अवस्थी को‌‌ निरुपमा शर्मा ‌‍सम्मान‌ और उर्मिला देवी उर्मि को‌ महादेवी‌ वर्मा सम्मान से विभूषित किया गया।
द्वितीय सत्र में संगोष्ठी में मुख्य अतिथि सुश्री नीतू गुजराल ने कहा कि हिंदी के माध्यम से न केवल सिंगापुर अपितु पूरे विश्व में भारतीय ज्ञान परंपरा विशेषकर साहित्य और संस्कृति ने दुनिया को नैतिकता का रास्ता दिखाया है। हिंदी की कहानी और कविताएं पंचतंत्र के समय से लोकप्रिय हैं। श्री क्लाडियस ने कहा कि हिंदी दुनिया के सौ से अधिक देशों में फैल चुकी है और इसका श्रेय हमारे भारतवंशी समाज को है।

श्री बद्री प्रसाद पारकर ने कहा कि लोक का संसार समूचे विश्व को भारत से जोड़ता है। इस अवसर पर डॉ राजेश अवस्थी और डॉ आर के सुखदेवे ने अपने अनुभव बताए।

साहित्य महोत्सव में डॉ राजेश अवस्थी ,शशि क्लडियस , आभा शर्मा , भारत देशमुख ,उर्मिला देशमुख ,धर्मांशु ऐश्वर्य आशिया ,सुमन ,सेवती हेमलाल साहू ,हरीश गेरा , बृज गुजराल की गरिमामय में उपस्थिति रही।

संयोजक डॉ तृषा शर्मा ने आभार व्यक्त किया। भाषा अस्मिता अकादमी और छत्तीसगढ़ मित्र के संयोजन में भारत से 32 सदस्यीय दल ने 13 जून से 17 जून तक सिंगापुर के सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का भ्रमण भी किया।

 

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