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CBSE की नई व्यवस्था से बढ़ी छात्रों की मुश्किलें, 9वीं के विद्यार्थियों को पुरानी किताबों का सहारा

 

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छत्तीसगढ़ के सीबीएसई स्कूलों में अध्ययनरत 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के सामने इस शैक्षणिक सत्र में एक नई परेशानी खड़ी हो गई है। नए पाठ्यक्रम के लागू होने के बावजूद कई विषयों की पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से स्कूलों को वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे पढ़ाई करानी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि छात्रों को फिलहाल छठवीं कक्षा की संस्कृत पुस्तक से पढ़ाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सीबीएसई ने नई शिक्षा व्यवस्था के तहत तीसरी भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया है। यह बदलाव अप्रैल में लागू किया गया, जबकि नया शैक्षणिक सत्र पहले ही शुरू हो चुका था। समय पर किताबें प्रकाशित नहीं होने के कारण स्कूल प्रबंधन और विद्यार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति केवल संस्कृत तक सीमित नहीं है। गणित की एक भाग-पुस्तक और सामाजिक विज्ञान की नई किताब भी बाजार में उपलब्ध नहीं है। नौ विषयों वाले पाठ्यक्रम में तीन विषयों की किताबें नहीं मिलने से नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। शिक्षकों को पुराने संसाधनों और वैकल्पिक सामग्री के माध्यम से पाठ्यक्रम पूरा कराने की कोशिश करनी पड़ रही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जिन पुस्तकों का इंतजार किया जा रहा है, उनके दिसंबर तक उपलब्ध होने की संभावना है। वहीं सीबीएसई स्कूलों में फरवरी से वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो जाती हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के पास परीक्षा की तैयारी के लिए बेहद सीमित समय बचेगा। इससे अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ गई है कि बच्चों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता का कहना है कि सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है, लेकिन आवश्यक किताबें अब तक नहीं पहुंची हैं। उनका मानना है कि किसी भी नए पाठ्यक्रम को अनिवार्य करने से पहले उसकी पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

किताबों की कमी ने प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और शिक्षाविदों का मानना है कि पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ-साथ समयबद्ध तरीके से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।

 

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