सीमा विवाद पर बदले नेपाल के सुर, बालेन शाह ने दिया दोस्ती का संदेश

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भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक गलियारों में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह “बालेन” ने संसद में इस जटिल मुद्दे पर बेहद संतुलित रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि सीमा का यह विवाद एकतरफा नहीं है.
हालांकि नेपाल की संसद के भीतर और बाहर उनके इस बयान का काफी विरोध हुआ है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों को तथ्यों का निष्पक्ष अध्ययन कर एक मित्र की तरह इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए.
नेपाल में आई युवा पीढ़ी की इस नई सरकार का ध्यान अतीत की उलझनों के बजाय भविष्य के सामाजिक और आर्थिक विकास पर है. नेपाल की राजनीति में आया यह नया बदलाव भारत के साथ संबंधों को एक व्यावहारिक और समान धरातल पर लाने का प्रयास कर रहा है, जहाँ “विशेष संबंधों” के पारंपरिक प्रोटोकॉल के बजाय बराबरी के स्तर पर बातचीत को प्राथमिकता दी जा रही है.
हाल ही में नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने और विदेश मंत्री शिशिर खनाल की भारत यात्रा ने भी इस दिशा में माहौल को सकारात्मक बनाने का काम किया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटिश काल के विरोधाभासी नक्शों और ऐतिहासिक दावों के उलझाव के कारण कूटनीतिक और विशेषज्ञ स्तर की अंतहीन चर्चाएं इस विवाद को और लंबा खींच सकती हैं. ऐसे में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का यह सुझाव बेहद तर्कसंगत है कि नेपाल को यह सीमा विवाद सीधे भारत के साथ मिलकर ही सुलझाना चाहिए.
इस गतिरोध को हमेशा के लिए समाप्त करने का सबसे बेहतर विकल्प यह होगा कि दोनों देश अपनी सदियों पुरानी खुली सीमा की परंपरा, सांस्कृतिक संबंधों और भारतीय व नेपाली सेना के बीच के मजबूत संस्थागत विश्वास का लाभ उठाएं.
अब समय आ गया है जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने राजनीतिक आत्मविश्वास और दूरदर्शी दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए, पारंपरिक नौकरशाही ढर्रे से ऊपर उठकर नेपाल के साथ एक प्रगतिशील और टिकाऊ द्विपक्षीय साझेदारी की नई शुरुआत करें.



