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होटल हाउसफुल, सुरक्षा शून्य:400 होटल, 650 रेस्टोरेंट और कैफे, 350 गेस्ट हाउस…… फायर ऑडिट सिर्फ 91 का

 

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राजधानी रायपुर की तंग गलियों में होटल, रेस्टोरेंट, क्लब, पब, कैफे और ढाबे संचालित हो रहे हैं। कमाई के लिए लोगों ने अपने घरों को गेस्ट हाउस में बदल दिया है, लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन कहीं नहीं हो रहा।

ऐसे कारोबार करने वाले करीब 80 फीसदी संचालकों ने न तो फायर ऑडिट कराया और न ही फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए हैं। यही नहीं अधिकांश जगहों पर अलग से न तो पानी का टैंक है और न ही सप्लाई पाइपलाइन। यही नहीं कई संचालकों ने अपने घरों को गेस्ट हाउस में बदल दिया, लेकिन निगम से इसकी अनुमति नहीं ली।

होटल एसोसिएशन के अनुसार रायपुर में 400 होटल हैं, जहां ठहरने की व्यवस्था है। इसके अलावा 650 से ज्यादा रेस्टोरेंट, कैफे, पब और क्लब हैं, जबकि 350 से ज्यादा गेस्ट हाउस संचालित हो रहे हैं। यह अधिकृत आंकड़े हैं। इनके अलावा 500 से ज्यादा लॉज और गेस्ट हाउस ऐसे हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है।

तंग गलियों के भीतर घरों को ही ठहरने का ठिकाना बना दिया गया है। इनका रिकॉर्ड नगर निगम के पास भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे इलाकों में दमकल की गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल है, जिससे आग लगने की स्थिति में राहत कार्य चुनौतीपूर्ण हो जाता है। शहर में अब तक केवल 91 होटल और रेस्टोरेंट में ही फायर ऑडिट हुआ है।

जहां कमी, नोटिस दिया जाएगा शासन ने फायर ऑडिट का काम अब थर्ड पार्टी को दे दिया है। निजी कंपनी अब इसकी जांच करती है। इसके अलावा फील्ड में जो हमारी टीम है, वो भी जांच करती है। दिसंबर में शहर के लगभग सभी होटल-रेस्टोरेंट का ऑडिट किया गया था, जहां कमी पाई गई, उन्हें नोटिस दिया गया था। – चंद्रमोहन सिंह, डायरेक्ट, फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट

तंग गलियों होटल, जहां कार तक नहीं जाती राजधानी के रेलवे स्टेशन से फाफाडीह और राठौर चौक-नहर पारा की ओर 3 किलोमीटर के दायरे में 180 से ज्यादा छोटे-बड़े होटल संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से 90 फीसदी संस्थानों में फायर फाइटिंग सिस्टम ही नहीं है। स्टेशन के पास होटल सत्कार गली में 400 मीटर के भीतर ही 24 होटल व गेस्ट हाउस संचालित हैं।

डाकघर के पीछे वाली गली में करीब 15 गेस्ट हाउस हैं, जो मूलतः मकान हैं, जिन्हें गेस्ट हाउस में बदल दिया गया है। दोनों गलियां इतनी तंग हैं कि आग लगने की स्थिति में दमकल की गाड़ियां तक अंदर नहीं पहुंच पाएंगी। इसके अलावा रेलवे स्टेशन के ठीक सामने 50 से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट संचालित हैं, जहां किसी तरह का फायर सेफ्टी सिस्टम नजर नहीं आया।

किसी भी रेस्टोरेंट, क्लब या पब में स्प्रिंकलर नहीं यहां छोटे-बड़े मिलाकर 250 से ज्यादा कैफे, पब, क्लब, रेस्टोरेंट, ढाबा और होटल संचालित हैं। निरीक्षण के दौरान कहीं भी छत या फॉल्स सीलिंग में स्प्रिंकलर सिस्टम नजर नहीं आया। न आगे और न पीछे कहीं पाइपलाइन या ज्वाइंट दिखा, जिससे जरूरत पड़ने पर पानी की बौछार की जा सके।

यहां तक कि 90 फीसदी जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर भी नहीं मिले। कई जगह चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। शहर के नामी रेस्टोरेंट में भी पानी की सप्लाई टैंकर से हो रही थी, जबकि फायर सेफ्टी के लिए अंडरग्राउंड टैंक और स्वतंत्र जल स्रोत अनिवार्य होता है। पब, क्लब, कैफे और रेस्टोरेंट में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा।

नियम है… पर शहर के 90 फीसदी होटल और रेस्टोरेंट में नहीं दिखा ये सिस्टम

फायर एक्सटिंग्विशर फायर अलार्म सिस्टम स्मोक डिटेक्टर फायर हाइड्रेंट सिस्टम स्प्रिंकलर सिस्टम फायर होज रील इमरजेंसी एग्जिट इमरजेंसी लाइटिंग फायर कंट्रोल रूम रेत की बाल्टी पानी की बाल्टी फायर ब्लैंकेट इमरजेंसी इवैक्यूएशन डीजी सेट, इलेक्ट्रिकल पैनल व किचन में विशेष अग्नि सुरक्षा व्यवस्था।

10 अप्रैल 2017 को गोल बाजार के होटल में लगी थी आग, 5 जिंदा जले थे रायपुर के गोलबाजार में 10 अप्रैल 2017 को चार मंजिला होटल में आग लगने से यहां ठहरे पांच व्यापारी जिंदा जल गए थे। इसके बाद पीछे के हिस्से में भी आग लगी, जिसमें सामान जलकर खाक हो गया। दोनों घटनाओं में दमकल की गाड़ियां अंदर तक नहीं पहुंच पाईं और सड़कों से ही पानी की बौछार करनी पड़ी।

फायर कर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि वहां फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं था और इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं था। होटल का कभी फायर ऑडिट नहीं हुआ था। घटना के बाद कलेक्टर ने सभी होटलों का फायर ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन बाद में यह आदेश ठंडे बस्ते में चला गया।

राज्य में सिर्फ 184 होटल का ऑडिट दिल्ली में हुई घटना के बाद सामने आया कि राज्य में 6000 से ज्यादा होटल, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और कैफे संचालित हैं, लेकिन इनमें से केवल 184 का ही फायर ऑडिट हुआ है। बाकी जगहों पर आज तक कोई जांच नहीं हुई। निगरानी व्यवस्था भी प्रभावी नहीं है।

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