इंद्रावती में सुविधाएं बदहाल…:100 करोड़ की बिल्डिंग में पिछले 13 साल से फाल्स सीलिंग अधूरी, टॉयलेट के कमोड व दरवाजे टूटे हुए

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नवा रायपुर की 100 करोड़ की हाईटेक विभागाध्यक्ष बिल्डिंग ‘इंद्रावती’ की हकीकत चौंकाने वाली है। 2012-13 में बनी इंद्रावती में 13 साल बाद भी अब तक फाल्स सीलिंग का काम अधूरा है। करीब 12 करोड़ से बनाए गए 200 से अधिक वॉशरूम में 60 फीसदी बंद पड़े हैं। ज्यादातर नलों की टोटियां गायब हैं।
पानी की सप्लाई ठप हो गई है। ऐसा क्यों? पड़ताल की तो खुलासा हुआ नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी एनआरडीए के अफसर करीब पिछले 10 साल से ठेकेदार को सिर्फ अधूरा काम पूरा करने के लिए ‘गुजारिश’ की चिट्ठियां लिखते रहे। मेंटेनेंस नहीं कराया।
अब जब बचे हुए वॉशरूम भी बंद होने लगे। पाइप लाइन लीकेज होने लगी तब ठेकेदार के बकाया 20 करोड़ जब्त किए। अब उन पैसों से बदहाल इंद्रावती बिल्डिंग को संवारा जा रहा है। इस बार 15 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
राज्य के प्रशासनिक कामकाज के लिए बनाई गई बहुमंजिला इमारत सभी विभागों का मुख्यालय है। सरकार के सारे काम काज के प्रस्ताव यहीं बनाकर मंत्रालय भेजे जाते हैं। यानी प्रशासनिक लिहाज से इंद्रावती भवन बेहद महत्वपूर्ण है। जब इंद्रावती भवन बनकर तैयार हुआ था तब आधुनिक सुविधाओं के मॉडल के तौर पर पेश किया गया और अंदरुनी खामियों को दबा दिया गया।
अब अन्य समस्याओं के साथ अधूरी फाल्स सीलिंग की सच्चाई भी सामने आ रही है। हैरानी की बात है कि 2013 में तैयार बिल्डिंग में आज तक फाल्स सीलिंग का काम अधूरा क्यों है, इसका जवाब किसी भी अफसर के पास नहीं है। जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदार द्वारा अधूरा काम छोड़ने के बावजूद विभाग ने सख्त कार्रवाई नहीं की।
करीब 20 करोड़ रुपए का फाइनल भुगतान रोककर रखा गया, लेकिन उसे समय पर पेनाल्टी के रूप में वसूलने के बजाय फाइलों में दबाकर रखा गया। पिछले 10 सालों में अफसर ठेकेदार को केवल पत्र लिखते रहे। इन पत्रों में काम पूरा करने की ‘गुजारिश’ की जाती रही, लेकिन ठेकेदार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
ग्राउंड-पहला फ्लोर : अंधेरे गलियारे, उखड़ी हुई सीलिंग गेट-3 से घुसते ही उधड़ी सीलिंग दिखी। अनुसूचित जाति विकास विभाग के गलियारे में अंधेरा है और फाल्स सीलिंग अधूरी है। इसी फ्लोर पर महिलाओं का वॉशरूम बंद मिला। जनसंपर्क कार्यालय के पास दीवार से पानी रिस रहा है। पहले फ्लोर पर महिला कोष विभाग में फॉल सीलिंग अधूरी है।
दूसरा फ्लोर: कबाड़ का अंबार और गायब टोटियां लिफ्ट के पास के वॉशरूम ब्लॉक हैं और नलों की टोटियां गायब हैं। भौमिकी तथा खनिकर्म संचालनालय के गलियारे में फर्नीचर का कबाड़ डंप हैं। अस्पताल (डिस्पेंसरी) में डॉक्टर ने बताया कि औसतन 60-70 मरीज रोज आते हैं। वहां वॉशरूम बंद मिले।
तीसरा फ्लोर: रस्सी के जुगाड़ से बंद किए वॉशरूम लिफ्ट के पास वाले वॉशरूम को बांधकर बंद किया गया है। लगभग हर विभाग में दिव्यांगों के लिए अलग व्यवस्था है, लेकिन एकाध को छोड़कर कहीं भी यह चालू स्थिति में नहीं है। उच्च शिक्षा में भी महिला-पुरुष दोनों वॉशरूम गंदगी और अंधेरे के कारण उपयोग के लायक नहीं हैं।
110 वॉशरूम में 55% बदहाल ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि 200 से अधिक वॉशरूम में 110 कॉमन हैं। करोड़ों खर्च होने के बावजूद सबसे ज्यादा बदहाली यहीं है। 110 में 60 से अधिक बंद हैं। जहां खुले हैं, वहां बेसिन टूटे हुए हैं और नलों से टोटियां गायब हैं। कई जगह टोटियां हैं तो पानी नहीं है।
जिम्मेदारों का कहना है
अधूरे काम पेनाल्टी के पैसों से पूरे किए जा रहे इंद्रावती का निर्माण काडा से कराया गया था। तब तय शर्तों के अनुसार ठेकेदार का भुगतान नहीं किया गया था। उसे पत्र लिखकर कई बार अधूरा काम करने को कहा गया था। फाइनल पेमेंट पिछले साल किया गया। उसी समय 20 करोड़ रोके गए थे। फिलहाल उन्हीं पैसों से 15 करोड़ में रिनोवेशन कराया जा रहा है।
पेनाल्टी लगाने की जानकारी नहीं है देखिये मेरी पोस्टिंग को दो साल ही हुए हैं। उसी समय जुर्माना क्यों नहीं वसूला गया, ये जानकारी नहीं दे सकता। हमने पिछले एक साल से प्रयास शुरू किया है। बकाया पैसों का भुगतान रोका गया। अब पेनाल्टी लगाकर उन्हीं पैसों से रिनोवेशन का काम किया जा रहा है।



