सीआईएसएफ की तर्ज पर ‘राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल’ का खाका-तैयार:उद्योगों को सुरक्षा, जवानों को मिलेगा 12% अतिरिक्त भत्ता, डीजीपी होंगे बल के प्रमुख

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छत्तीसगढ़ के औद्योगिक प्रतिष्ठानों को अब सुरक्षा खतरों से बचाने के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच मिलने जा रहा है। राज्य सरकार ने राजपत्र में “छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल नियम, 2026” को अधिसूचित कर दिया है।
केंद्र के सीआईएसएफ की तर्ज पर बने इस बल से न केवल उद्योगों को पेशेवर सुरक्षा मिलेगी, बल्कि इसमें प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले पुलिस जवानों को अतिरिक्त भत्ते और सुविधाएं भी मिलेंगी। इसकी कमान पुलिस महानिदेशक के हाथों होगी।
इस बल में छत्तीसगढ़ पुलिस और सशस्त्र बल के जवानों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा, जिन्हें उनके मूल वेतन के साथ 12 प्रतिशत का ‘अतिरिक्त प्रतिनियुक्ति भत्ता’ दिया जाएगा। जवानों की फिटनेस और फुर्ती सुनिश्चित करने के लिए आयु सीमा भी स्पष्ट कर दी गई है।
इसके तहत आरक्षक के लिए अधिकतम आयु 40 वर्ष, प्रधान आरक्षक के लिए 45 वर्ष, सहायक उप निरीक्षक के लिए 50 वर्ष और निरीक्षक स्तर के लिए 52 वर्ष तय की गई है। प्रतिनियुक्ति की यह अवधि 5 वर्ष की होगी जिसे विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 6 वर्ष तक किया जा सकेगा, साथ ही इसके लिए जवानों का कम से कम 7 वर्ष तक सेवा में होना अनिवार्य है।
खर्च सरकार का नहीं उद्योगों का होगी नियमों के अनुसार, सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी उद्योग में अफसर सहित 59 जवानों से कम की टुकड़ी तैनात नहीं की जाएगी। उद्योगों को बल की तैनाती के लिए पुलिस महानिदेशक से अनुरोध करना होगा और सुरक्षा आंकलन के लिए 1,00,000 रुपये का अग्रिम शुल्क जमा करना होगा।
सबसे अहम बात यह है कि इस बल का वित्तीय भार राज्य सरकार पर नहीं, बल्कि उस उद्योग प्रबंधन पर होगा जहां बल की तैनाती होगी। उद्योगों को जवानों के वेतन, वर्दी, हथियार, वाहन, ईंधन और प्रशिक्षण आदि के खर्च के साथ-साथ कुल खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा ‘प्रशासनिक या पर्यवेक्षण प्रभार’ के रूप में अतिरिक्त देना होगा। वेतन और भत्तों का भुगतान उद्योगों को दो महीने के एडवांस बिल के रूप में जमा करना अनिवार्य होगा।
मुफ्त आवास-यूनियन पर पाबंदी बल में कड़े अनुशासन के साथ-साथ जवानों की सुविधाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया है। उद्योग प्रबंधन को जवानों के लिए मुफ्त आवास, चिकित्सा सुविधाएं, परेड ग्राउंड और शस्त्रागार उपलब्ध कराने होंगे और आवास न होने की स्थिति में मकान किराया भत्ता देना होगा।
ड्यूटी के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कोई भी अधिकारी या जवान अपनी आकस्मिक जरूरतों के लिए अधिकतम 2500 रुपये से ज्यादा नकद नहीं रख सकेगा। इसके साथ ही, बल के सदस्यों के किसी भी प्रकार का संघ (यूनियन) बनाने पर सख्त पाबंदी रहेगी।
सुरक्षा देने के अलावा, यह बल सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों को सुरक्षा ऑडिट, अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए ‘सशुल्क तकनीकी परामर्श’ भी मुहैया कराएगा, जिसके लिए अलग से शुल्क निर्धारित किया जाएगा। दो शाखाओं में बांटे गए बल : बल को दो स्पष्ट शाखाओं में बांटा गया है एक कार्यपालक (मैदानी ड्यूटी) और अनुसचिवीय (कार्यालयीन कार्य)। कार्यपालक के प्रमुख डीजीपी होंगे। उनके अधीन विशेष डीजीपी, अतिरिक्त डीजीपी, आईजी, डीआईजी, सेनानी , उप-सेनानी और सहायक सेनानी शामिल होंगे। इसी प्रकार कार्यपालक पद में कंपनी कमांडर (निरीक्षक), प्लाटून कमांडर (उप-निरीक्षक), सहायक प्लाटून कमांडर, प्रधान आरक्षक और आरक्षक (ट्रेडमेन सहित) होंगे जबकि मंत्रालयी पद में कार्यालय अधीक्षक से लेकर सहायक उप-निरीक्षक-अ तक के पद शामिल हैं ।



