छत्तीसगढ़प्रमुख खबरें

बिलासपुर के स्वीमिंग पूल में 2 माह का 1500 शुल्क, रायपुर में ठेके पर 1 महीने 2000 रुपए की वसूली

 

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

, छत्तीसगढ़  गर्मी बढ़ते ही शहर में स्वीमिंग पूल की मांग बढ़ गई है, लेकिन नगर निगम के पूल में भी निजी क्लब जैसा शुल्क लेने से विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, छत्तीसगढ़ के निगमों में शुल्क का बड़ा अंतर दिख रहा है। बिलासपुर के स्वीमिंग पूल में 2 माह का 1500 शुल्क ले रहे हैं। इसका निगम ही संचालन करता है, जबकि रायपुर में ठेके पर 1 महीने का 2000 रुपए वसूल रहे हैं।

नगर निगम के पूल में भी निजी क्लब के बराबर शुल्क लिए जाने पर लोगों में नाराजगी है। विक्रम साहू, जितेंद्र सिंह और ​रितुराज सिन्हा का आरोप है कि सुविधा देने के बजाय निगम ने ठेके पर संचालन देकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि निगम का उद्देश्य सस्ती सुविधा देना होना चाहिए, न कि ठेके के जरिए शुल्क बढ़ाना।

दोनों स्वीमिंग पूल्स में ऐसे समझें अंतर

बिलासपुर: एक घंटे का 100 रु. लेता है निगम दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि बिलासपुर नगर निगम 1981 से अपना पूल खुद संचालित कर रहा है। यहां 2 महीने का पैकेज 1500 रुपए है, जबकि अस्थायी सदस्यों से एक घंटे का 100 रुपए शुल्क लिया जाता है। सुबह-शाम चार-चार शिफ्ट में ट्रेनिंग दी जाती है और कम फीस के कारण हर बैच में करीब 50 लोग शामिल होते हैं।

रायपुर: एक घंटे का 150 रुपए लेता है ठेकेदार रायपुर नगर निगम का पूल 2014 से है। शुरुआत में संचालन निगम करता था, लेकिन बाद में मेंटेनेंस के नाम पर इसे ठेके पर दे दिया गया। वर्तमान में ठेका अक्षांश पूल्स नामक की कंपनी के पास है, जिसे 2027 तक संचालन करना है। यहां एक महीने का शुल्क 2000 रुपए और एक घंटे का 150 रुपए लिया जा रहा है।

कर्मचारियों का व्यवहार ठीक नहीं है, राेजाना बदतमीजी भी निगम पूल में एक घंटे के लिए आने वाले लोगों के साथ कर्मचारियों का व्यवहार भी सवालों में है। आरोप है कि उन्हें समय से पहले बाहर आने के लिए कहा जाता है और किनारों पर रुकने पर भी हटाया जाता है। कई बार इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन ठेकेदार पर कोई कार्रवाई या चेतावनी नहीं दी गई। आए दिन लोगों से बदतमीजी की जा रही है।

कमेटी ने तय किया है शुल्क स्वीमिंग पूल का शुल्क कलेक्टर की अध्यक्षता वाली कमेटी तय करती है। यह फीस निजी पूलों के आधार पर तय की गई है। यदि शुल्क अधिक लगता है तो इसे रिवाइज के लिए कमेटी के पास भेजा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर भविष्य में निगम खुद संचालन कर सकता है।

Related Articles

Back to top button