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गोल्डन आवर बचाता है ज़िंदगियां”: सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी पर रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों की चेतावनी

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस पर विशेषज्ञों ने युवाओं की जान बचाने के लिए गोल्डन आवर उपचार और जिम्मेदार ड्राइविंग पर जोर दिया

 

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रायपुर, 11 जनवरी 2026: राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस के अवसर पर रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने सड़क यातायात दुर्घटनाओं के बढ़ते बोझ पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ये दुर्घटनाएं भारत में रोकी जा सकने वाली मौतों और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में अब भी शामिल हैं।

डॉक्टरों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाएं रोज़ाना होने वाली आपातकालीन भर्तियों का एक बड़ा हिस्सा हैं, जिनमें अधिकांश पीड़ित 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा होते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार और ट्रैफिक नियमों के सख्त पालन से इनमें से कई चोटों को रोका जा सकता है।

डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि दुर्घटना के बाद पहले 60 मिनट — जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है — के भीतर ट्रॉमा-सुसज्जित अस्पताल तक पहुंचना जीवन और मृत्यु के बीच अंतर तय कर सकता है, क्योंकि समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप से जीवित रहने और बेहतर रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है।

रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स के डॉ. संतोष सिंह, एमईएम, एचओडी – इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर, ने कहा,

“सड़क दुर्घटनाएं समय-संवेदनशील आपात स्थितियां होती हैं। हम अक्सर गंभीर सिर की चोटों, आंतरिक रक्तस्राव और मल्टीपल ट्रॉमा के मरीजों का इलाज करते हैं। बचाव में देरी, गलत तरीके से संभालना और गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल न पहुंच पाना परिणामों को और खराब कर देता है। हेलमेट और सीटबेल्ट पहनना, ओवरस्पीडिंग से बचना और नशे की हालत में वाहन न चलाना जैसे सरल उपाय अनगिनत जानें बचा सकते हैं।”

सड़क दुर्घटनाएं जटिल फ्रैक्चर, रीढ़ की हड्डी की चोटों और स्थायी विकलांगता का भी एक बड़ा कारण बनी हुई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक बोझ पड़ता है। रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स के डॉ. पंकज धाबलिया, एचओडी – ऑर्थोपेडिक, ट्रॉमा, जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स इंजरीज़, ने कहा,

“कई दुर्घटना पीड़ितों को अनेक सर्जरी और लंबे समय तक पुनर्वास की आवश्यकता होती है। कई मामलों में चोटें जीवनभर की गतिशीलता संबंधी समस्याओं का कारण बन जाती हैं। ट्रैफिक नियमों का पालन और सुरक्षा उपकरणों का उपयोग चोट की गंभीरता और दीर्घकालिक जटिलताओं को काफी हद तक कम कर सकता है।”

रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने दुर्घटना पीड़ितों के सही प्राथमिक उपचार और सुरक्षित स्थानांतरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने सलाह दी कि विशेषकर सिर, गर्दन या रीढ़ की चोट की आशंका होने पर पीड़ित को अनावश्यक रूप से न हिलाया जाए। यदि स्थानांतरण अपरिहार्य हो, तो मरीज को स्थिर रखें, सीधा लिटाएं और सिर व गर्दन को सहारा दें। तुरंत आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें, क्योंकि एंबुलेंस में प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध होते हैं। अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में साफ कपड़े से दबाव बनाएं और पीड़ित को खाना या पानी न दें। सांस में बाधा न हो तो हेलमेट को अचानक न हटाएं।

इस संदर्भ में, अस्पताल ने कुछ महीने पहले शुरू किए गए अपने “पावर ऑफ 3” अभियान को भी दोहराया, जिसके तहत रायपुर के सभी नागरिकों को निम्नलिखित सुविधाएं मिलती हैं:

• आपातकालीन कॉल 3 रिंग के भीतर अटेंड की जाती हैं।
• रायपुर में एंबुलेंस 30 मिनट के भीतर पहुंचती है।
• इमरजेंसी रूम डॉक्टर मरीज के पहुंचने के 3 मिनट के भीतर उपचार शुरू करता है।

कटे या अंग-विच्छेदन से जुड़े हादसों में डॉक्टरों ने सबसे पहले रक्तस्राव नियंत्रित करने की सलाह दी। कटे हुए अंग को साफ कपड़े या स्टेराइल गॉज में लपेटकर एक साफ वाटरप्रूफ बैग में रखें और बर्फ के पैक से ठंडा रखें, लेकिन बर्फ या पानी के सीधे संपर्क में न रखें। मरीज और कटा हुआ अंग दोनों को बिना देरी के ट्रॉमा-सुसज्जित अस्पताल ले जाएं, क्योंकि समय पर उपचार से अंग बचाने की संभावना हो सकती है।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस के संदेश के तहत रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स ने आम जनता से अपील की:

हमेशा हेलमेट और सीटबेल्ट पहनें
ओवरस्पीडिंग और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग से बचें
शराब के नशे में कभी वाहन न चलाएं
बच्चों के लिए उपयुक्त सुरक्षा उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित करें
दुर्घटना की स्थिति में तुरंत आपातकालीन सेवाओं को कॉल करें

रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स ने बताया कि वह उन्नत आपातकालीन और ट्रॉमा केयर सेवाएं प्रदान करता है, जिन्हें इमरजेंसी फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक सर्जन, न्यूरोसर्जन और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम का समर्थन प्राप्त है, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर और समग्र उपचार मिल सके।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा दिवस पर रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल्स ने दोहराया कि सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, और सड़क पर लिया गया एक सतर्क निर्णय जीवन और विकलांगता के अपूरणीय नुकसान को रोक सकता है। सड़क सुरक्षा सिर्फ नियमों के बारे में नहीं है — यह ज़िंदगियां बचाने के बारे में है।

रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल के बारे में:

1992 में स्थापित, रामकृष्ण CARE हॉस्पिटल CARE Hospitals Group का हिस्सा है। यह NABH से मान्यता प्राप्त है और गुणवत्ता व नवाचार के लिए जाना जाता है। अस्पताल में उन्नत बुनियादी ढांचा, रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी, विशेषीकृत आईसीयू और 30 से अधिक विशेषज्ञताएं उपलब्ध हैं, जिनमें कार्डियोलॉजी, न्यूरोसाइंसेज़, ऑन्कोलॉजी, नेफ्रोलॉजी सहित कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शामिल हैं। इसका 24/7 आपातकालीन विभाग, जिसे 2025 में AHPI द्वारा सम्मानित किया गया, गंभीर मरीजों के लिए त्वरित देखभाल सुनिश्चित करता है। इम्यूनोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सहित विस्तारित ऑन्कोलॉजी सेवाओं के साथ, अस्पताल किफायती, संवेदनशील और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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