जांजगीर: कोटवारों का धरना, संविलियन और 15 हजार मानदेय की मांग, SDM को ज्ञापन

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जांजगीर । छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में ग्रामीण शासन की मजबूत कड़ी कहे जाने वाले कोटवारों ने अपनी उपेक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर कोटवारों ने एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया. प्रदर्शन के उपरांत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम एसडीएम को चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रस्तुत किया, जिसमें मुख्य रूप से राजस्व विभाग में संविलियन और प्रतिमाह न्यूनतम 15,000 रुपये पारिश्रमिक देने का आग्रह किया गया है.
ग्रामीण अंचलों में सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार से लेकर राजस्व से जुड़े प्रशासनिक दायित्वों को पूरी निष्ठा से संभालने वाले कोटवारों का दर्द है कि रात-दिन सेवा देने के बावजूद वे आज तक स्थायी कर्मचारी के दर्जे से महरूम हैं.
कोटवार संघ का तर्क है कि यदि उन्हें नियमित कर राजस्व विभाग में शामिल किया जाता है, तो उन्हें ग्रेच्युटी, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा, जिससे उनका और उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित हो पाएगा.
पारिश्रमिक में व्याप्त असमानता पर विरोध जताते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब सभी कोटवारों से समान रूप से कार्य लिया जाता है, तो फिर वेतन में अलग-अलग श्रेणियां क्यों तय की गई हैं? बढ़ती महंगाई का हवाला देते हुए उन्होंने सभी श्रेणियों के कोटवारों को एक समान मानते हुए कम से कम 15 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित करने की मांग उठाई.
इसके अलावा, शहरीकरण के नाम पर रोकी गई भर्तियों और स्थानीय नियुक्तियों में पारदर्शिता का मुद्दा भी जोर-शोर से उभरा.
कोटवारों ने आरोप लगाया कि रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जबकि परंपरा के अनुसार कोटवार परिवारों के योग्य सदस्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों के नगरीय निकायों (नगर पंचायत, पालिका व निगम) में शामिल होने के बाद सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र या असमय मृत्यु के चलते खाली हुए पदों पर लगी रोक को हटाकर नई नियुक्ति प्रक्रिया अविलंब शुरू करने का आग्रह किया गया.



