मध्य प्रदेश में जिंदगी और अपनों से नाखुश होकर 37 लोग हर दिन मौत को गले लगा रहे हैं। पिछले चार साल में यहां 55,299 लोगों ने आत्महत्या की

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भोपाल। मध्य प्रदेश में जिंदगी और अपनों से नाखुश होकर 37 लोग हर दिन मौत को गले लगा रहे हैं। पिछले चार साल में यहां 55,299 लोगों(Madhya Pradesh suicide data) ने आत्महत्या की। इस मामले में सागर जिला सबसे आगे है। पिछले चार साल में यहां आत्महत्या के 2,451 मामले दर्ज हुए। वहीं 2,333 आत्महत्याओं के साथ भोपाल दूसरे और खरगोन (2004 मामले) तीसरे नंबर पर रहा।

चौंकाने वाली बात यह है कि एनसीआरबी के आंकड़ों में भोपाल के मुकाबले इंदौर में आत्महत्या के मामले ज्यादा हैं, लेकिन विधानसभा में पेश रिपोर्ट में पिछले चार साल में इंदौर के मुकाबले भोपाल में आत्महत्या करने वालों की संख्या ज्यादा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2023 की रिपोर्ट में भी आत्महत्या के मामले में मध्य प्रदेश महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर रहा।
प्रदेश में बढ़ते आत्महत्या के मामले न सिर्फ पुलिस बल्कि समाज और सरकार के लिए भी चिंता का विषय हैं। एक जनवरी 2022 से अब तक के आत्महत्या से जुड़े मामलों की यह जानकारी डॉ. मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से बुधवार को विधानसभा में नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार के प्रश्न के लिखित जवाब में दी। इस दौरान यह भी बताया गया कि कुछ मामलों में आत्महत्या के लिए उकसाने वालों पर भी एफआइआर दर्ज की गई है।
बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में चार साल में आत्महत्या के 119 मामले दर्ज हुए। वहीं बीते एक वर्ष में यह आंकड़ा 50 रहा।
सर्वाधिक आत्महत्या वाले पांच जिले
सागर : 2451
भोपाल : 2333
खरगोन : 2004
धार : 1963
इंदौर : 1776
सबसे कम आत्महत्या वाले पांच जिले
छिंदवाड़ा : 94
अनूपपुर : 80
नरसिंहपुर : 80
अशोक नगर : 66
पांढुर्णा : 17



