आरकेसी से हटाई गई शिक्षिका होगी बहाल,हाईकोर्ट का आदेश

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
बिलासपुर–छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राजकुमार कॉलेज के शिक्षक को 18 साल बाद नौकरी से निकालने के फैसले को अवैध बताया है।कोर्ट ने सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराते हुए शिक्षक को दोबारा नौकरी पर रखने और बकाया वेतन 9प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है। साथ ही हाईकोर्ट ने रायपुर के राजकुमार कॉलेज प्रबंधन की अपील खारिज कर दी।
प्रबंधन के नौकरी से निकालने के फैसले के खिलाफ शिक्षिका ने अपील की। 8 मई 2012 को संबंधित अधिकारी ने शिक्षिका के पक्ष में फैसला सुनाया। उन्हें दोबारा नौकरी पर रखने और पिछला पूरा वेतन 9 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज के साथ देने का आदेश दिया गया।अपीलीय अधिकारी के इस आदेश के खिलाफ कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। सिंगल बेंच ने 17 मार्च 2026 को प्रबंधन की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद प्रबंधन ने डिवीजन बेंच में अपील की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि 1990 के नियुक्ति पत्र में बीएड की डिग्री जरूरी नहीं थी। 1994 में शिक्षिका की नौकरी पक्की करते समय भी प्रबंधन ने बीएड को लेकर कोई आपत्ति नहीं की थी।कोर्ट ने कहा कि शिक्षिका को नौकरी से निकालते समय भी मुख्य वजह छात्रों की कम संख्या बताई गई थी। ऐसे में 18 साल बाद बीएड की डिग्री नहीं होने को आधार बनाकर नौकरी से निकालना सही नहीं है।



