टोल पर वसूली 100%, तो जिंदगी बचाने का इंतजाम 0% क्यों वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर का NHAI पर बड़ा कानूनी प्रहार
मनोज सिंह ठाकुर की आरटीआई में एनएचएआई का कबूलनामा: 100+ किमी लंबे रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर सिर्फ 2 एम्बुलेंस; डॉक्टर और अस्पतालों का रिकॉर्ड तक नदारद! "सड़क निजी कंपनी को बेचकर पल्ला झाड़ा": अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने दर्ज कराई प्रथम अपील (NHAIN/A/E/26/02643); सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर हाईकोर्ट में PIL की तैयारी

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रायपुर। जब आम जनता से फास्टैग के जरिए एक-एक किलोमीटर का 100% टोल टैक्स वसूला जा रहा है, तो सड़क हादसों में घायल नागरिकों की जान बचाने के लिए बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं पूरी क्यों नहीं हैं?”—यह सीधा और तीखा सवाल उठाते हुए रायपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्र सरकार की विधिक व प्रशासनिक जवाबदेही तय कर दी है। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत हासिल किए गए आधिकारिक दस्तावेजों ने साबित कर दिया है कि राजमार्गों पर टोल वसूली तो शत-प्रतिशत हो रही है, लेकिन हादसों के शिकार यात्रियों के लिए जीवन रक्षक व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने छत्तीसगढ़ (रायपुर-बिलासपुर, रायपुर-नागपुर, रायपुर-जगदलपुर, ओडिशा बॉर्डर) और दिल्ली-एनसीआर के हाईवे कॉरिडोर्स पर 24×7 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस, ट्रॉमा केयर सेंटर, संबद्ध अस्पतालों, ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों की तैनाती और 1033 हेल्पलाइन के रिस्पॉन्स टाइम को लेकर एनएचएआई से आधिकारिक दस्तावेज मांगे थे।
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर की आरटीआई से हुए 5 बड़े खुलासे 100+ किमी लंबे हाईवे पर केवल 2 एम्बुलेंस पाइंट:
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर की आरटीआई के जवाब में एनएचएआई बिलासपुर ने लिखित रूप से स्वीकार किया है कि इतने व्यस्त रायपुर-बिलासपुर नेशनल हाईवे (NH-130) पर केवल दो स्थानों—भोजपुरी (Km 97.516) और मुडपार (Km 110.300) पर ही एम्बुलेंस की व्यवस्था है। शेष पूरे 100 किलोमीटर से अधिक लंबे हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था शून्य है।
संबद्ध अस्पतालों और डॉक्टरों का कोई अता-पता नहीं:
जब अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने पूछा कि सड़क हादसे के शिकार पीड़ित को तत्काल किन अनुबंधित अस्पतालों में ले जाया जाएगा और वहां 24 घंटे ड्यूटी पर कितने इमरजेंसी डॉक्टर व प्रशिक्षित पैरामेडिक्स तैनात रहते हैं, तो एनएचएआई ने हाथ खड़े कर दिए। विभाग के पास अनुबंधित अस्पतालों और डॉक्टरों का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है।
निजी कंपनी के नाम पर एनएचएआई का गैर-जिम्मेदाराना रवैया:
एनएचएआई ने लिखित जवाब में यह गैर-जिम्मेदाराना दलील दी कि रायपुर-बिलासपुर मार्ग को ‘NHIT Southern Projects Pvt. Ltd.’ को मुद्रीकृत (हस्तांतरित) कर दिया गया है, इसलिए अनुबंध और एसओपी का रिकॉर्ड उनके पास नहीं है। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने इसे नागरिकों के जीवन रक्षा की सरकारी निगरानी से भागने वाला गैर-संवैधानिक कदम करार दिया।
10 मिनट में मदद का दावा निकला कागजी छलावा:
एनएचएआई के अनुसार 1033 हेल्पलाइन पर कॉल के बाद 10 किमी के दायरे में 10 मिनट के भीतर एम्बुलेंस पहुंचने का नियम है। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने जमीनी हकीकत उजागर करते हुए बताया कि 100 किमी के दायरे में मात्र दो गाड़ियां होने के कारण ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के बाद का पहला घंटा) में एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती और समय पर इलाज न मिलने से घायल दम तोड़ देते हैं।
नागपुर, जगदलपुर और ओडिशा बॉर्डर की जानकारी छिपाई:
नागपुर-रायपुर (NH-53), रायपुर-जगदलपुर (NH-30) और ओडिशा बॉर्डर जैसे दुर्घटना-संभावित मार्गों की जानकारी देने के बजाय एनएचएआई ने क्षेत्राधिकार का बहाना बनाकर आरटीआई कानून की धारा 6(3) का खुला उल्लंघन किया।
अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने दर्ज कराई प्रथम विधिक अपील:
एनएचएआई बिलासपुर द्वारा दी गई अपूर्ण और टालमटोल वाली जानकारी के खिलाफ वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (क्षेत्रीय अधिकारी, NHAI रायपुर) के समक्ष प्रथम अपील दर्ज करा दी है, जिसका पंजीयन संख्या NHAIN/A/E/26/02643 है।
अपील में अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ‘डॉ. एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ’ मामले में व्यवस्था दी है कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा संविधान के अनुच्छेद 21 (जीने का अधिकार) का अनिवार्य हिस्सा है। निजी कंपनी को सड़क सौंपकर एनएचएआई जीवन रक्षा की अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता।
वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर का सीधा बयान:
टोल प्लाजा पर एक सेकंड की छूट नहीं मिलती, फास्टैग से पूरा टैक्स काटा जाता है—फिर हाईवे पर नागरिकों की जान बचाने के नाम पर यह आपराधिक लापरवाही क्यों? निजीकरण का बहाना बनाकर एनएचएआई जनता की जिंदगी से नहीं खेल सकता। हमने प्रथम अपील (NHAIN/A/E/26/02643) दर्ज करा दी है। यदि तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 50 किमी पर सुसज्जित एम्बुलेंस, 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती और संबद्ध अस्पतालों की पारदर्शी सूची सार्वजनिक नहीं की गई, तो हम सीधे बिलासपुर उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे।”
मनोज सिंह ठाकुर (वरिष्ठ अधिवक्ता)


