पदोन्नति और वरिष्ठता लाभ की आस लगाए बैठे 27शिक्षकों को हाई कोर्ट से झटका,

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बिलासपुर – पदोन्नति और वरिष्ठता से जुड़े लाभ की मांग कर रहे प्राथमिक शालाओं के 27 प्रधान पाठकों को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी रिट अपील खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस मुद्दे पर पहले ही न्यायालय अपना रुख स्पष्ट कर चुका है और अब किसी अलग राहत की गुंजाइश नहीं बचती। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अमित कुमार दुबे सहित अन्य प्रधान पाठकों द्वारा दायर अपील को निरस्त करते हुए एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा।

रायपुर और धमतरी जिले के विभिन्न शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में पदस्थ प्रधान पाठकों ने 24 नवंबर 2025 को पारित एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी। एकलपीठ ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जिसके बाद उन्होंने डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने अपील दाखिल करने में हुई 60 दिनों की देरी को माफ कर दिया। इसके बाद मामले के गुण-दोष पर सुनवाई की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रमोद रामटेके ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता प्रसून कुमार भादुड़ी उपस्थित हुए।
पुराने फैसले से तय हुआ मामला
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि यह मामला पहले से तय हो चुके पुष्पलता मानिकपुरी व अन्य बनाम राज्य शासन के समान है। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि उनका मामला सोना साहू बनाम राज्य शासन प्रकरण जैसी परिस्थितियों वाला है। इसलिए 10 मार्च 2017 के परिपत्र के आधार पर किया गया उनका दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि एकलपीठ ने सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद याचिकाएं खारिज की थीं। उस आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता।


