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RSS की शाखा बनाने की कोशिश’, छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मंत्रों के जाप पर विपक्ष का भारी बवाल

 

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से सुबह की असेंबली में बच्चों की कतारों के बीच एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यहां हाजिरी और प्रार्थनाओं के साथ-साथ मंत्रों का उच्चारण भी गूंज रहा है।

राज्य सरकार इसे बच्चों में अनुशासन, सांस्कृतिक मूल्य और देशभक्ति की भावना जगाने का प्रयास बता रही है, लेकिन इस फैसले पर राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर क्लासरूम के जरिए वैचारिक एजेंडा थोपने का आरोप लगाया है।

मंत्रों से आती है आध्यात्मिक शक्ति: सीएम साय

इस कदम का बचाव करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों का चरित्र-निर्माण करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रोच्चार से बच्चों में आध्यात्मिक शक्ति जागृत होती है और उन्हें सच्चे देशभक्त बनने में मदद मिलती है। इसका उद्देश्य छात्रों के बीच नैतिक मूल्यों और अनुशासन को मजबूत करना है।

सरकारी स्कूलों को RSS शाखा बनाने की कोशिश: विपक्ष

इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को आरएसएस की शाखाओं में बदलने की कोशिश कर रही है।

शुक्ला ने कहा कि बच्चों को अच्छे संस्कार देने का कोई विरोध नहीं करता, लेकिन एक धर्मनिरपेक्ष समाज में सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र और अन्य धार्मिक मंत्रों को अनिवार्य करना गंभीर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने सवाल उठाया, “अगर मंत्रों को शामिल किया जा रहा है, तो क्या सरकार इस्लाम, बाइबिल या गुरु ग्रंथ साहिब की सकारात्मक सीखों को भी पाठ्यक्रम में शामिल करेगी? अगर नहीं, तो केवल एक ही परंपरा पर ध्यान क्यों दिया जा रहा है?”

कांग्रेस हमेशा से सनातन विरोधी: भाजपा

विपक्ष के इन आरोपों पर भाजपा ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस पर सनातन विरोधी होने का आरोप लगाया और दावा किया कि विपक्ष ने हमेशा से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का विरोध किया है।

यादव ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा सनातन मूल्यों का विरोध किया है। यही कारण है कि वे अब इस अच्छी पहल का भी विरोध कर रहे हैं।

दूसरी ओर, स्कूल के अधिकारियों और शिक्षकों का मानना है कि मंत्रोच्चार से छात्रों में एकाग्रता, अनुशासन और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। रायपुर के डीपी पुजारी स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि बच्चों ने इस बदलाव को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और इससे स्कूल में अधिक अनुशासित माहौल बन रहा है।

क्या है नया नियम और दिनचर्या?

छत्तीसगढ़ में 16 जून से सरकारी स्कूल एक संशोधित दैनिक दिनचर्या के साथ खुले हैं। इस नए नियम के तहत स्कूल के दिन में अलग-अलग समय पर विभिन्न मंत्रों का पाठ करना अनिवार्य कर दिया गया है। सुबह की प्रार्थना सभा से लेकर छुट्टी की आखिरी घंटी तक, छात्रों को एक व्यवस्थित तरीके से मंत्रोच्चार में शामिल किया जा रहा है।

जिसमें सबसे ज्यादा चर्चा दोपहर के मिड-डे मील से पहले गाए जाने वाले भोजन मंत्र की हो रही है। इसके अलावा, स्कूल की छुट्टी होने और घर जाने से पहले भी छात्रों के लिए एक विशेष मंत्र का उच्चारण करना तय किया गया है।

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