छत्तीसगढ़ में खाली पड़े डीईओ पदों पर जल्द नियुक्तियां, खराब रिजल्ट वालों को हटाने की तैयारी

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रायपुर। प्रदेश में लंबे समय से खाली पड़े जिला शिक्षा अधिकारी (DEO appointment,) पदों पर जल्द नियुक्तियां होने की संभावना है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे जिलों की सूची तैयार कर ली है, जहां डीईओ रिटायर हो चुके हैं या लंबे समय से पद रिक्त हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्राथमिकता वाले जिलों में अगले दो से तीन दिनों के भीतर नई पोस्टिंग सूची जारी की जा सकती है।
हालांकि, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव (Gajendra Yadav) फिलहाल दिल्ली दौरे पर हैं। उनके रायपुर लौटने के बाद विभाग द्वारा नई सूची जारी किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कमजोर परीक्षा परिणाम वाले जिलों की हो रही समीक्षा
स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बार बोर्ड परीक्षा परिणामों को लेकर भी सख्ती शुरू कर दी है। जिन जिलों में 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम कमजोर रहा है, वहां के जिला शिक्षा अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा रही है।
विभागीय जानकारी के अनुसार रायपुर, बिलासपुर, बलौदाबाजार, दुर्ग, बालोद, एससीबी, जांजगीर-चांपा, सक्ती और कवर्धा जिलों में बोर्ड परीक्षा का परिणाम 50 से 70 प्रतिशत के बीच रहा है। ऐसे जिलों में प्रशासनिक बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
कई जिलों में डीईओ पद अब भी खाली
प्रदेश के बलौदाबाजार, जशपुर और खैरागढ़ जिलों में वर्तमान में डीईओ के पद रिक्त हैं। बलौदाबाजार और खैरागढ़ में अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद दूसरे जिलों के डीईओ को अतिरिक्त प्रभार देकर कामकाज चलाया जा रहा है।
वहीं हाल ही में एक संयुक्त संचालक (जेडी) के रिटायर होने के बाद वहां भी प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति की गई है। कई जिलों और शिक्षा संभागों में नियमित अधिकारियों के स्थान पर प्रभारी व्यवस्था के भरोसे प्रशासनिक कामकाज संचालित हो रहा है।
सबसे अधिक चर्चा जशपुर जिले को लेकर है, जहां डीईओ प्रमोद भटनागर के सेवानिवृत्त होने के तीन महीने बाद भी नियमित नियुक्ति नहीं हो पाई है। इससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
अलग डीईओ कैडर बनाने की तैयारी
स्कूल शिक्षा विभाग अब जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। विभाग अलग डीईओ कैडर बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि शिक्षा प्रशासन को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाया जा सके।
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान व्यवस्था में अलग डीईओ कैडर नहीं है। राज्य गठन के 25 वर्षों बाद भी व्याख्याताओं और प्राचार्यों को पदोन्नति या प्रशासनिक आधार पर डीईओ बनाया जाता रहा है।
प्रशासनिक अनुभव को दी जाएगी प्राथमिकता
विभाग का मानना है कि प्रशासनिक अनुभव की कमी के कारण कई जिलों में शिक्षा व्यवस्था और मॉनिटरिंग प्रभावित होती है। इसी को देखते हुए अब ऐसे अधिकारियों को प्राथमिकता देने की तैयारी है, जिनके पास प्रशासनिक अनुभव हो।
सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत डीईओ पद के लिए अलग सेवा ढांचा तैयार किया जाएगा, जिससे जिला स्तर पर शिक्षा प्रशासन अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके।



