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फॉर्म 7 कों भरने और जमा करने मे भारी अनियमित गंभीर षड़यंत्र- वदूद आलम, प्रदेश महासचिव, आप

SIR प्रक्रिया में जाति-समुदाय विशेष को निशाना बनाया जा रहा है, चुनाव आयोग करे उच्चस्तरीय जांच-भूपेंद्र चंद्राकर, प्रदेश उपाध्यक्ष, आपइस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो-समीर खान, प्रदेश सह संगठन मंत्री, आपइस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो-समीर खान, प्रदेश सह संगठन मंत्री, आप

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रायपुर, 4 फरवरी 2026।छत्तीसगढ़ में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) ने चुनावी और प्रशासनिक व्यवस्था पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के नाम पर लोकतंत्र की जड़ों पर चोट की जा रही है और एक “सत्ता-समर्थित राजनीतिक तंत्र” के इशारे पर जाति और समुदाय विशेष को चिन्हांकित कर मताधिकार से वंचित करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है।आप ने चुनाव आयोग से उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई और FIR दर्ज करने की खुली चुनौती दी है।

प्रदेश महासचिव वदूद आलम ने कहा कि यह मामला केवल कागजी अनियमितताओं का नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेदों पर सीधा हमला है।
“आज अगर वोटर लिस्ट के जरिए कमजोर वर्गों को बाहर किया गया, तो कल लोकतंत्र का चरित्र ही बदल दिया जाएगा। यह लोकतंत्र की परीक्षा की घड़ी है,” इसे “प्रशासनिक गलती नहीं, सत्ता-संरक्षित षड्यंत्र” बताते हुए कहा कि समाज के ST, SC और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलने की कोशिश की जा रही है।

प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र चंद्राकर ने कहा कि “यदि चुनाव आयोग ने निष्पक्षता नहीं दिखाई, तो आम आदमी पार्टी सड़क, सदन और न्यायालय—तीनों मोर्चों पर लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई छेड़ेगी।”
“फॉर्म-7 बना वोट काटने का हथियार”—आप का बड़ा आरोप
जिस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना था, उसे “वोट काटने के औजार” में बदल दिया गया है। जहां नाम जोड़ने के लिए दस्तावेज़ों का पहाड़ खड़ा किया जाता है, वहीं फॉर्म-7 के जरिए नाम काटने के लिए न पहचान मांगी जा रही है, न हस्ताक्षर का भौतिक सत्यापन।उन्होंने चेतावनी दी कि यह सीधे-सीधे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का उल्लंघन है, जिसमें गलत जानकारी देने पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
सवाल यह है कि अब तक कितने फर्जी आपत्तिकर्ताओं पर कार्रवाई हुई? या कानून केवल कागजों में ही है?”

प्रदेश सह संगठन मंत्री समीर खान ने कहा कि
छह लोकतांत्रिक चोटें”
मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में पार्टी ने जिन बिंदुओं को “लोकतंत्र पर सीधा प्रहार” बताया, वे इस प्रकार हैं—
30% मतदाताओं को अचानक नोटिस
प्रथम प्रकाशन और आपत्ति की समय-सीमा समाप्त होने के बाद “Logical Discrepancies” के नाम पर लगभग 30% मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए, जबकि राजनीतिक दलों को इसकी औपचारिक सूचना नहीं दी गई।

प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ ने कहा कि
जाति-समुदाय विशेष पर केंद्रित आपत्तियां
20 जनवरी के बाद राज्यभर में ST, SC और मुस्लिम समुदाय से जुड़े मतदाताओं के नामों पर संगठित तरीके से आपत्तियां दर्ज की गईं। खल्लारी और महासमुंद विधानसभा की सूची पार्टी ने प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत की।
एक व्यक्ति, दर्जनों आपत्तियां
आरोप है कि एक ही व्यक्ति ने एक दिन में 5 से 30 तक आपत्तियां दर्ज कराईं, जबकि उसका संबंधित मतदान केंद्र से कोई वैध संबंध नहीं था।

रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अज़ीम खान ने कहा कि
ERO की भूमिका संदेह के घेरे में
खल्लारी विधानसभा क्षेत्र में ERO द्वारा आपत्तियां सीधे स्वीकार की गईं, जबकि नियमानुसार यह प्रक्रिया BLO के माध्यम से होनी चाहिए थी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी
फॉर्म-7 के तहत जिन मतदाताओं पर आपत्ति दर्ज हुई, उनकी पहचान और EPIC नंबर सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे।
हस्ताक्षर और दस्तावेज़ सत्यापन में गंभीर चूक
फॉर्म-7 के मामलों में न तो पहचान पत्र मांगे गए और न ही हस्ताक्षर का भौतिक सत्यापन किया गया, जिससे फर्जी आवेदन आयोग तक पहुंचने का रास्ता खुला।

महासमुंद जिला संगठन मंत्री सरफराज खान ने कहा कि
लोकतंत्र बनाम साजिश”—राजनीतिक संग्राम का ऐलान
इसे केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं, बल्कि देशव्यापी लोकतांत्रिक संकट करार दिया। पार्टी का कहना है कि यदि मतदाता सूची को राजनीतिक हथियार बनने दिया गया, तो निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा ही समाप्त हो जाएगी।
प्रतिनिधिमंडल की कड़ी मांगें
3 फरवरी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी यशवंत कुमार को सौंपे गए ज्ञापन में पार्टी ने—
उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच,
दोषी अधिकारियों पर विभागीय और आपराधिक कार्रवाई,
फर्जी आपत्तिकर्ताओं पर तत्काल FIR,
और फॉर्म-7 प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

रायपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश महासचिव वदूद आलम, प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र चंद्राकर, प्रदेश सह संगठन मंत्री समीर खान, प्रदेश सचिव अनुषा जोसेफ, रायपुर लोकसभा अध्यक्ष अजीम खान, महासमुंद जिला संगठन मंत्री सरफराज खान सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
अंत में आम आदमी पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR प्रक्रिया को लेकर यह लड़ाई अब प्रशासनिक गलियारों तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी के अनुसार, यह “वोट बनाम वर्चस्व” की जंग है—और इस जंग में वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर संवैधानिक मंच पर आवाज बुलंद करेगी।

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