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प्रख्यात कवि-कथाकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, ज्ञानपीठ पुरस्कार से हो चुके थे सम्मानित, रायपुर के अस्पताल में ली अंतिम सांसें

 

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रायपुर। प्रख्यात हिंदी साहित्यकार, कवि और उपन्यासकार तथा भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल (89 वर्ष) का आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था।एम्स प्रबंधन ने 4 बजकर 58 मिनट पर उनके निधन की पुष्टि की। विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के उन विरल रचनाकारों में थे, जिनकी भाषा अत्यंत सरल होते हुए भी गहरी संवेदना, मानवीय करुणा और दार्शनिक गहराई से भरपूर थी। नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने आम आदमी के जीवन, अकेलेपन और संघर्ष को असाधारण ढंग से शब्द दिए। उनका जाना सिर्फ साहित्य जगत ही नहीं, बल्कि पूरी सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक युग का अंत है।

1 जनवरी 1937 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे विनोद कुमार शुक्ल हिन्दी साहित्य के ऐसे रचनाकार थे, जो मंचों पर बहुत धीमे और कम बोलते थे, लेकिन उनकी साहित्यिक आवाज़ बेहद दूर तक सुनाई देती थी। वे उन लेखकों में थे जिन्होंने शोर, घोषणाओं और आडंबर से दूर रहकर साहित्य को एक गहरी मानवीय संवेदना दी।

उनकी रचनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने मध्यमवर्गीय, साधारण और लगभग अनदेखे जीवन को अपनी कविताओं, कहानियों और उपन्यासों का केंद्र बनाया। उनके यहाँ एक साधारण कमरा, खिड़की, पेड़, घास का टुकड़ा या एक चुप्पी भी पूरे ब्रह्मांड में बदल जाती है। उनकी भाषा में शोर नहीं, बल्कि गहरी शांति और भीतर तक उतरने वाली संवेदना है।

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