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झीरम नक्सली हमला सुपारी किलिंग थी: कांग्रेस

 

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रायपुर झीरम घाटी नक्सल अटैक को लेकर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बयान ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला दिया है. कांग्रेस ने नड्डा के बयान को शहीद नेताओं और पीड़ित परिवारों का अपमान बताते हुए इसे एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है.

झीरम नक्सली हमला सुपारी किलिंग थी”:

कांग्रेस का कहना है कि परिवर्तन यात्रा के दौरान नेताओं को चुन-चुनकर मारा जाना सामान्य नक्सली हमला नहीं, बल्कि पूरी तरह सुपारी किलिंग का मामला है. मंगलवार को राजीव भवन में हुई पत्रकार वार्ता में पीड़ित, मारे गए नेताओं के परिजन और प्रत्यक्षदर्शी एक साथ सामने आए. उन्होंने सुरक्षा में जानबूझकर चूक, खुफिया तंत्र की विफलता और बड़े राजनीतिक सौदे के आरोप लगाए.

झीरम नक्सली हमला 25 मई 2013 को हुआ था. इस दिन कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर घात लगाकर नक्सलियों ने हमला कर दिया. नक्सलियों ने एक साथ छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के कई नेताओं को मौत के घाट उतार दिया. मरने वालों में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्या चरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार सहित लगभग 30 से ज्यादा नेता, कार्यकर्ता और कई जवान शामिल थे.

चुन-चुनकर कांग्रेस नेताओं को मारा गया- मलकीत सिंह गेंदू:

मलकीत सिंह गेंदू ने नड्डा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परिवर्तन यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं को नाम लेकर, चुन-चुनकर गोलियों से भून दिया गया. उन्होंने कहा कि जिस तरह से 200–250 नक्सली 10–12 दिनों तक इलाके में डटे रहे, उससे साफ है कि यह सामान्य घटना नहीं थी. सवाल उठता है कि उस समय का इंटेलिजेंस तंत्र और तत्कालीन रमन सिंह सरकार क्या कर रही थी.

झीरम नक्सली हमले के प्रत्यक्षदर्शी ने क्या कहा :

झीरम नक्सली हमले में घायल शिव सिंह ठाकुर ने कहा कि वे पूरी परिवर्तन यात्रा में शामिल थे और एक दिन भी गैरहाजिर नहीं रहे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह पूरी घटना सुपारी किलिंग थी. पहले से सूचना थी कि 200-250 नक्सली 8-10 दिनों से इलाके में डटे हैं, इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए. उन्होंने आरोप लगाए कि आज तक किसी जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ तक नहीं की.

जांच को जानबूझकर रोका गया-सुशील आनंद शुक्ला

कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा कभी एनआईए, कभी सीबीआई जांच की बात करती रही, लेकिन हर बार जांच से पीछे हटती रही. कांग्रेस सरकार ने एसआईटी बनाई तो भाजपा ने स्टे ले लिया. न्यायिक जांच भी बीच में रोक दी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का सच सामने आए.

रोड ओपनिंग पार्टी नहीं दी गई, जबकि नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पहले से थी. एलेक्स पॉल मेनन अपहरण मामले में जिस तरह उस समय बड़ी डील कर कलेक्टर को छुड़ाया गया था, झीरम घाटी में भी वैसी ही किसी बड़ी डील की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता-

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