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छत्तीसगढ़ सरकार ने उच्च न्यायालय को सूचित जेलों में कैदियों की मृत्यु दर में आई कमी

 

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छत्तीसगढ़ सरकार ने बुधवार को उच्च न्यायालय को सूचित किया कि राज्य की जेलों में कैदियों की मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है. सरकार द्वारा पेश किए गए एक आधिकारिक हलफनामे के अनुसार, साल 2021 से 31 मार्च 2026 के बीच जेलों में कुल 354 मौतें दर्ज की गई हैं. आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हाल के वर्षों में इन मौतों में कमी आई है, जिसका मुख्य कारण जेलों में बेहतर चिकित्सा देखभाल और उन्नत प्रबंधन प्रणाली है.

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि साल 2024 की तुलना में 2025 में कैदियों की मृत्यु में लगभग 18% की उल्लेखनीय कमी आई है. हलफनामे में उन मीडिया रिपोर्टों को “भ्रामक” और तथ्यों से परे बताया गया है जिनमें जेल में मौतों को लेकर अनियमितताओं का दावा किया गया था.

सरकार ने स्पष्ट किया कि अधिकांश मौतें उपचार के दौरान अस्पतालों में हुई हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि कैदियों को समय पर चिकित्सा सहायता और संस्थागत सहयोग प्रदान किया जा रहा है.

जेलों में स्वास्थ्य ढांचे का विवरण देते हुए सरकार ने कहा कि सभी कारागारों में चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं. कैदियों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ गंभीर मामलों में उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफरल की सुविधा और दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है.

इसके अलावा, कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग, ध्यान, काउंसलिंग और आत्महत्या रोकथाम जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं. मनोरोग देखभाल के लिए जिला अस्पतालों और बिलासपुर स्थित राज्य मानसिक स्वास्थ्य अस्पताल की मदद ली जा रही है.

सरकार ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक हिरासत में हुई मृत्यु का पोस्टमार्टम और न्यायिक जांच अनिवार्य रूप से की जाती है.

जेल प्रशासन ने किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी से इनकार किया है. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सरकार के प्रयासों पर संतोष जताते हुए कहा कि यह राज्य द्वारा कैदियों के कल्याण की दिशा में किए जा रहे सक्रिय सुधारों को दर्शाता है. साथ ही, दुर्ग केंद्रीय जेल के अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की प्रगति रिपोर्ट भी अदालत में पेश की गई है.

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