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छत्तीसगढ़: 5 माओवादियों ने कांकेर में किया समर्पण, राजनांदगांव से लाल आतंक का खात्मा

 

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नई दिल्ली। माओवाद मुक्‍त किए जाने कि समय सीमा से पांच दिन पहले राजनांदगांव पुलिस रेंज पूर्णत: माओवादी मुक्‍त हो गया है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (एमएमएसी) और कांकेर जिला की सीमा पर सक्रिय राजनांदगांव कांकेर बार्डर (आरकेबी) डिविजन के माओवादी एसीएम मंगेश पोडियमी, एसीएम गणेश वीके, एसीएम मंगती जुर्री, एसीएम हिडमे मरकाम उर्फ सुनीता, एसीएम राजे ने कांकेर जिले में आत्‍समर्पण कर दिया।

इन्‍होंने एक एसएलआर और दो .303 रायफल भी सरेंडर की है। इनकी तलाश कई महीनों से की जा रही थी। राजनांदगांव पुलिस रेंज में शामिल राजनांदगांव, खैरागढ़ व कवर्धा जिला जनवरी में ही माओवाद प्रभाव से मुक्‍त हो चुका था।

13 अगस्‍त 2025 को एमएमएसी जिले के बांदा पहाड़ में मुठभेड़ में सेंट्रल कमेटी मेंबर विजय रेड्डी, डिविजनल कमेटी मेंबर लोकेश सलामे के एनकाउंटर के बाद ही इस जिले में माओवादियों की आखिरी गिनती शुरु हो गई थी। तभी से बचे हुए माओवादी कैडर इधर-उधर छिपते फिर रहे थे।

15 मार्च को संयुक्‍त बलों का इन माओवादियों की टुक‍ड़ी से सामना भी हुआ था जहां ये अपना सारा सामान छोड़ कर फरार हो गए थे। सुरक्षाबलों ने यहां से एक बंदूक, 15 जिंदा कारतूस व अन्‍य वस्‍तुएं बरामद की थी। एक पत्र भी मिला था जिसमें शीर्ष नेतृत्‍व से समर्पण के संबंध में मार्गदर्शन मांगे जाने का उल्‍लेख था। इसी दिन तय हो गया था कि बचे हुए कैडर हथियार डालने की तैयारी में है।

36 साल बना रहा आतंक का साया

एमएमएसी जिले में 1981-90 के दशक में माओवाद की लहर पहुंची थी। नक्‍सलबाड़ी से शुरु होकर तेलंगाना, बस्‍तर के रास्‍ते जल-जंगल-जमीन की लड़ाई का नारा यहां बुलंद हुआ और मोहला, मानपुर व औंधी इसका गढ़ बना। वर्ष 2009 में पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे सहित 29 जवान मानपुर के करीब कोरकोट्टी में माओवादियों के एंबुश में बलिदान हुए थे।

इसके बाद सीआरपीएफ, आइटीबीपी की फोर्सेस के साथ संयुक्‍त बलों ने यहां वृहद उन्‍मूलन अभियान चलाया। साल दर साल माओवादियों का घेरा छोटा होता गया। लगभग 36 सालों के इस लाल पड़ाव का आज कांकेर में माओवादियों के कैडर के साथ अंत हो गया।

यशपाल सिंह, पुलिस अधीक्षक, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी ने कहा कि आरकेबी डिविजन के अंतिम सक्रिय माओवादी पांच सदस्‍यों ने आज कांकेर जिले में आत्‍मसमर्पण कर दिया। उन्‍होंने ही जानकारी दी कि उनके दो साथी पहले ही संगठन छोड़ चुके हैं। इस तरह अब मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पूर्ण रुप से माओवाद प्रभाव से मुक्‍त हो गया है।

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