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High BP: खानपान ही नहीं, दिमाग के सिग्नल भी हैं जिम्मेदार; एक्सपर्ट ने बताया कैसे रखें खुद को सुरक्षित

 

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लाइफस्टाइल   अब तक हाई ब्लड प्रेशर को गलत खानपान, ज्यादा नमक, तनाव और मोटापे से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन हालिया रिसर्च ने इस सोच को बदलने के संकेत दिए हैं। ऑकलैंड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी के मुताबिक, हाई बीपी के पीछे दिमाग की भूमिका भी बेहद अहम हो सकती है।

शोध में बताया गया है कि दिमाग के निचले हिस्से में मौजूद लैटरल पैराफेशियल रीजन नाम का भाग ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर यह हिस्सा सांस लेने, दिल की धड़कन और पाचन जैसी ऑटोमैटिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी क्षेत्र की कुछ नसें ब्लड वेसल्स को सिकोड़कर बीपी बढ़ाने का काम करती हैं।

क्या निकला रिसर्च में

रिसर्च के मुताबिक, हंसना, जोर से खांसना या शारीरिक गतिविधि के दौरान यह हिस्सा सक्रिय हो जाता है। इसके चलते नसें संकरी हो जाती हैं और खून के बहाव में दबाव बढ़ जाता है। अगर यह प्रक्रिया बार-बार होती है, तो हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ सकता है।

अब तक मेडिकल साइंस में माना जाता था कि नमक, शराब, मोटापा और तनाव ही हाई बीपी के मुख्य कारण हैं, लेकिन यह स्टडी बताती है कि दिमाग दिल और नसों को लगातार सिग्नल भेजकर ब्लड प्रेशर को प्रभावित करता है। साथ ही, शरीर में मौजूद कुछ प्रोटीन भी दिमाग को जरूरत से ज्यादा सक्रिय कर सकते हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

डॉ. विनीत बंगा, निदेशक न्यूरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल फरीदाबाद, के अनुसार बिना मोटापे और तनाव के भी बीपी बढ़ सकता है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी, नींद पूरी न होना, जेनेटिक कारण, किडनी या हार्मोनल समस्याएं, ज्यादा चाय-कॉफी, स्मोकिंग और कम पानी पीना भी इसके अहम कारण हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई खोज भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए नए और ज्यादा प्रभावी विकल्प खोल सकती है।

 

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