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फिजिकल हेल्थ- क्या आपको हार्ट अटैक का रिस्क है:कैल्शियम स्कोर टेस्ट से पता चलेगा, डॉक्टर से जानें इससे जुड़े हर जरूरी सवाल का जवाब

 

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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ के मुताबिक, भारत में होने वाली हर चार में से एक मौत का कारण हार्ट और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियां हैं। चिंता की बात यह है कि कई बार इन बीमारियों का पता तब चलता है, जब स्थिति गंभीर हो जाती है। लेकिन क्या हो, अगर समय रहते हार्ट डिजीज के खतरे का अंदाजा लगाया जा सके? कैल्शियम स्कोर टेस्ट इसमें मददगार हो सकता है। यह टेस्ट हार्ट की आर्टरीज में जमा कैल्शियम का पता लगाता है, जिससे समय रहते कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) के जोखिम का पता चलता है।

इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में कैल्शियम स्कोर टेस्ट के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • किन लोगों को कैल्शियम स्कोर टेस्ट कराना चाहिए?
  • क्या इस टेस्ट के कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं?
  • एक्सपर्ट– डॉ. समीर गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, मेट्रो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, नोएडा

    सवाल- कैल्शियम स्कोर टेस्ट क्या है और ये हार्ट डिजीज का पता कैसे लगाता है?

    जवाब- यह एक खास तरह का सीटी स्कैन है। इसे कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (CAC) टेस्ट भी कहते हैं। यह टेस्ट हार्ट तक ब्लड पहुंचाने वाली धमनियों में जमा प्लाक का पता लगाता है। इसे ऐसे समझिए-

    • जब धमनियों में फैट, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जमा होने लगता है, तो उसे ‘प्लाक’ कहते हैं। समय के साथ यह प्लाक कैल्सिफाइड (सख्त) हो जाता है।
    • इससे आर्टरीज सिकुड़ सकती हैं या ब्लॉक हो सकती हैं, जिसके कारण हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है।
    • यह स्कैन कुछ ही मिनटों में यह माप लेता है कि धमनियों में कितना कैल्शियम जमा है। इसके आधार पर एक स्कोर मिलता है।
    • स्कोर जितना ज्यादा होता है, हार्ट की धमनियों के ब्लॉकेज होने का और हार्ट अटैक का रिस्क उतना ही ज्यादा माना जाता है।

    सवाल- किन लोगों को कैल्शियम स्कोर टेस्ट करवाना चाहिए?

    जवाब- डॉक्टर आमतौर पर यह टेस्ट उन लोगों को करवाने की सलाह देते हैं, जिन्हें हार्ट डिजीज का रिस्क ज्यादा होता है। इसे ग्राफिक में देखिए

    सवाल- कैल्शियम स्कोर टेस्ट की पूरी प्रक्रिया क्या है?

    जवाब- यह एक नॉन-इनवेसिव CT स्कैन है। इसमें शरीर पर कोई चीरा नहीं लगाया जाता और आमतौर पर इंजेक्शन या कंट्रास्ट डाई की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी प्रक्रिया ऐसे समझिए-

    • मरीज को CT स्कैन की टेबल पर पीठ के बल लिटाया जाता है।
    • सीने पर ECG के छोटे पैच लगाए जाते हैं, ताकि स्कैन के दौरान दिल की धड़कन पर नजर रखी जा सके।
    • टेबल धीरे-धीरे स्कैनर के अंदर जाती है। मशीन हार्ट की तस्वीरें लेती है।
    • इस दौरान कुछ सेकेंड के लिए सांस रोकने को कहा जा सकता है।
    • इन तस्वीरों से डॉक्टर कोरोनरी आर्टरीज में जमा कैल्शियम की मात्रा मापते हैं और कैल्शियम स्कोर तय करते हैं।
    • इस टेस्ट में आमतौर पर 10–15 मिनट लगते हैं।

    सवाल- कैल्शियम स्कोर टेस्ट के समय क्या सावधानियां जरूरी हैं?

    जवाब- इस टेस्ट के लिए आमतौर पर खास तैयारी की जरूरत नहीं होती। लैब सेंटर के निर्देशों का पालन करना और डॉक्टर को अपनी दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी देना सबसे जरूरी है। सभी सावधानियां नीचे देखें-

    सवाल- कैल्शियम स्कोर टेस्ट का रिजल्ट कैसे पता चलता है?

    जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

    • टेस्ट में हार्ट की आर्टरीज में जमा कैल्शियम की मात्रा के आधार पर एक स्कोर मिलता है।
    • यह स्कोर 0-400 या इससे ज्यादा हो सकता है। स्कोर बढ़ने के साथ कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) का जोखिम भी बढ़ता जाता है।

      सवाल- सामान्य कैल्शियम स्कोर क्या होता है?

      जवाब- अगर किसी का कैल्शियम स्कोर शून्य है तो इसका मतलब है कि उसे अगले दो से पांच सालों में हार्ट अटैक का रिस्क बहुत कम है। इसे ‘नेगेटिव स्कैन’ भी कहते हैं। इसमें हार्ट की आर्टरीज में कैल्शियम नहीं होता है। हालांकि डॉक्टर इसके अलावा अन्य रिस्क फैक्टर्स भी चेक करते हैं।

      सवाल- अगर रिजल्ट पॉजिटिव है तो क्या करना चाहिए?

      जवाब- इसका मतलब है कि हार्ट की आर्टरीज में कैल्शियम जमना शुरू हो गया है। ऐसे में तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से मिलकर सलाह लें।

      • डॉक्टर जरूरत के अनुसार कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और दूसरी जांच की सलाह दे सकते हैं।
      • जरूरत पड़ने पर वे कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएं दे सकते हैं।
      • इसके साथ ही खानपान में बदलाव करें।
      • डाइट में फाइबर, हरी सब्जियां और फल शामिल करें।
      • अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड न खाएं।
      • नियमित रूप से एक्सरसाइज (जैसे वॉक, योग या कार्डियो) करें।
      • अगर स्मोक करते हैं या शराब पीते हैं तो उसे तुरंत छोड़ दें।

      ध्यान रखें, पॉजिटिव रिजल्ट का मतलब यह नहीं है कि हार्ट की धमनियां पूरी तरह ब्लॉक हैं। आगे का इलाज कैल्शियम स्कोर और अन्य रिस्क फैक्टर्स पर निर्भर करता है।

      सवाल- क्या इस टेस्ट के कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं?

      जवाब- यह टेस्ट आमतौर पर सुरक्षित होता है। इसमें कम मात्रा में रेडिएशन का इस्तेमाल होता है, जिससे जोखिम बहुत कम रहता है। हालांकि, बार-बार टेस्ट कराने से रेडिएशन का एक्सपोजर बढ़ सकता है।

      सवाल- कैल्शियम स्कोर टेस्ट कितनी बार करा सकते हैं?

      जवाब- यह डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। अगर एक बार टेस्ट हो चुका है और आपका स्कोर सामान्य या कम है, तो डॉक्टर इसे 3-5 साल बाद दोबारा कराने की सलाह देते हैं। अगर स्कोर ज्यादा है, तो डॉक्टर ट्रीटमेंट या फॉलो-अप टेस्ट्स पर फोकस करते हैं।

      सवाल- क्या ‘जीरो’ स्कोर का मतलब यह है कि हार्ट डिजीज का रिस्क बिल्कुल नहीं है?

      जवाब- इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भविष्य में कभी हार्ट डिजीज नहीं होगी। दरअसल नॉन-कैल्सिफाइड प्लाक शुरुआती चरण में इस स्कैन में नजर नहीं आते। इसलिए हमेशा हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखना जरूरी है।

      सवाल- क्या कैल्शियम स्कोर जीरो होने पर कोलेस्ट्रॉल की दवा लेने की जरूरत नहीं होती?

      जवाब- ऐसा जरूरी नहीं है। जीरो स्कोर का मतलब है कि जांच में हार्ट की धमनियों में कैल्शियम नहीं मिला। लेकिन इससे हार्ट डिजीज का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता। कुछ लोगों में बिना कैल्शियम वाला प्लाक भी हो सकता है। अगर LDL कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा है, डायबिटीज है या हार्ट डिजीज की फैमिली हिस्ट्री है, तो डॉक्टर दवा लेने की सलाह दे सकते हैं। इसलिए जीरो स्कोर के आधार पर खुद से दवा बंद न करें।

      सवाल- क्या यह टेस्ट महंगा होता है?

      जवाब- हां, यह एक एडवांस सीटी स्कैन है। इसलिए इसकी कीमत सामान्य ब्लड टेस्ट या साधारण एक्स-रे के मुकाबले ज्यादा है। भारत में आमतौर पर यह टेस्ट 2-6 हजार के बीच है।

      सवाल- किन लोगों को ये टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं होती है?

      जवाब- कुछ स्थितियों में यह टेस्ट कराने से खास फायदा नहीं मिलता या इसे टालने की सलाह दी जा सकती है, जैसेकि-

      जिन्हें पहले से हार्ट डिजीज है

      • हार्ट अटैक आ चुका है, स्टेंट लगा है या बाइपास सर्जरी हुई है, तो कैल्शियम स्कोर टेस्ट से आमतौर पर अतिरिक्त जानकारी नहीं मिलती।
      • ऐसे मरीजों की जांच और इलाज उनकी स्थिति के अनुसार तय होता है।

      कम जोखिम वाले स्वस्थ लोग

      • जिनमें हार्ट डिजीज के रिस्क फैक्टर्स नहीं हैं, उन्हें आमतौर पर यह टेस्ट कराने की जरूरत नहीं होती।
      • टेस्ट की जरूरत उम्र, कोलेस्ट्रॉल और अन्य रिस्क फैक्टर्स के आधार पर तय की जाती है।

      प्रेग्नेंट महिलाएं

      इस टेस्ट में रेडिएशन का इस्तेमाल होता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान ये टेस्ट नहीं किया जाता है।

      सवाल- हार्ट को हेल्दी रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करें?

      जवाब- हार्ट को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव बेहद जरूरी हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

    • कैल्शियम स्कोर टेस्ट हार्ट डिजीज के जोखिम का आकलन करने में मदद करता है। हालांकि, यह टेस्ट हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है और न ही इससे हार्ट अटैक का खतरा पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, स्वस्थ वजन और तंबाकू से दूरी जरूरी है।

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