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छत्तीसगढ़ में बैंकिंग क्रांति: 13 वर्षों में कर्ज वितरण 364% बढ़ा

 

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 छत्तीसगढ़ के आर्थिक परिदृश्य में पिछले 13 वर्षों के दौरान एक बड़ी तब्दीली महसूस की गई है, जहां राज्य की बैंकिंग व्यवस्था अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत और सक्रिय नजर आ रही है. स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी (SLBC) के हालिया आंकड़ों ने इस बदलाव की तस्दीक की है, जिसमें साल 2013 से लेकर 2026 तक कर्ज वितरण और बैंक जमा के मामलों में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी देखी गई है.

आंकड़ों के आईने में देखें तो 2013 में प्रदेश का कुल लोन पोर्टफोलियो जो महज 49,094 करोड़ रुपये था, वह साल 2026 तक छलांग लगाकर 2.77 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर गया है. ऋण वितरण के क्षेत्र में दर्ज की गई यह लगभग 364 प्रतिशत की वृद्धि स्पष्ट करती है कि प्रदेश में व्यापारिक और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए पूंजी की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है.

पूंजी की मांग के साथ-साथ बैंकों के प्रति आम जनता का विश्वास भी गहरा हुआ है, जिसका प्रमाण बैंक खातों में जमा होने वाली राशि से मिलता है. जहां 13 साल पहले बैंकों में जमा पूंजी 87 हजार करोड़ रुपये के आसपास थी, वहीं अब यह बढ़कर 3.18 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो गई है. 

जिलेवार आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि राजधानी रायपुर इस आर्थिक रेस में सबसे आगे दौड़ रही है, जहां का सीडी रेशियो 129 फीसदी तक जा पहुंचा है. इसका सीधा मतलब यह है कि रायपुर में जमा होने वाली राशि के मुकाबले कर्ज लेने की रफ्तार कहीं ज्यादा है.

चौंकाने वाली बात यह है कि बस्तर का दंतेवाड़ा जिला भी इस मामले में पीछे नहीं है और 109 प्रतिशत से अधिक सीडी रेशियो के साथ दूसरे पायदान पर बना हुआ है, जो वहां बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का शुभ संकेत है. 

हालांकि, जहां बेमेतरा और दुर्ग जैसे जिले विकास की औसत पटरी पर हैं, वहीं कोरिया और मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी जैसे इलाकों में अब भी बैंकिंग विस्तार की काफी गुंजाइश बनी हुई है. जानकारों का कहना है कि इन पिछड़े क्षेत्रों में उद्योगों को बढ़ावा देने और आय के नए साधन पैदा करने से ही बैंकिंग सेवाओं की पहुंच और बेहतर हो सकेगी.

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