छत्तीसगढ़

माओवादी हिंसा के बाद बस्तर क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है

 

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रायपुर : माओवादी हिंसा से मुक्ति के बाद बस्तर क्षेत्र में अब शिक्षा व्यवस्था को सुधारना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हिंसा के दौरान स्कूलों को निशाना बनाया गया था, कई भवनों को विस्फोट कर नष्ट कर दिया गया और शिक्षक इस क्षेत्र में पदस्थापना से बचते रहे। इसका परिणाम यह हुआ कि कई स्कूल शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक के भरोसे चलने लगे।

बीजापुर सबसे अधिक प्रभावित

बीजापुर जिले में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां 324 स्कूलों में केवल एक शिक्षक पदस्थ है और 12 स्कूल पूरी तरह शिक्षक विहीन हैं। इसके अलावा बस्तर जिले में 297, कांकेर में 74, दंतेवाड़ा में 10, कोंडागांव में 19, सुकमा में 186 और नारायणपुर में 68 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।

पूरे प्रदेश में चिंताजनक आंकड़े

राज्य सरकार की हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 1,933 स्कूल ऐसे हैं, जो सिर्फ एक शिक्षक पर निर्भर हैं। इनमें से 978 स्कूल बस्तर संभाग में और 955 अन्य जिलों में स्थित हैं। इसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

अतिशेष और कमी का विरोधाभास

जहां एक ओर कई जिलों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर कई जगहों पर शिक्षक अतिशेष हैं। राजधानी रायपुर में 304 शिक्षक अतिरिक्त हैं। कांकेर में 341, कोंडागांव में 192, बलरामपुर-रामानुजगंज में 128 और जशपुर में 262 शिक्षक अतिशेष घोषित किए गए हैं। कुल मिलाकर प्रदेश में 1,227 शिक्षक अतिशेष हैं।

अन्य जिलों की स्थिति भी गंभीर

महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा, सरगुजा सहित कई जिलों में भी एकल शिक्षक स्कूलों की संख्या अधिक है। बलरामपुर-रामानुजगंज में 113 स्कूल एक शिक्षक पर निर्भर हैं और पांच स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं है। जशपुर में दो स्कूल शिक्षक विहीन हैं।

 

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