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देवास पुलिस की झारखंड में बड़ी कार्रवाई, व्हाट्सएप APK लिंक से ठगी करने वाला गिरोह बेनकाब; 4 शातिर गिरफ्तार

 

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देवास। साइबर ठगी पर अंकुश लगाने के लिए लागू ई-जीरो एफआइआर प्रणाली के तहत देवास पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। व्हाट्सएप पर भेजी गई संदिग्ध एपीके फाइल के जरिए 4.75 लाख रुपये की ठगी करने वाले झारखंड के संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने 1500 किलोमीटर दूर गिरिडीह से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने ठगी गई राशि में से 4.01 लाख रुपये और चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

एपीके लिंक से हुआ मोबाइल हैक

एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि 3 जनवरी को लक्ष्मीबाई मार्ग नाहर दरवाजा निवासी महान मालवीय के मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से आरटीओ चालान एपीके लिंक भेजी गई थी। लिंक डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक हो गया और बैंक खाते से 4.75 लाख रुपये निकाल लिए गए।

तकनीकी जांच से पहुंची पुलिस

शिकायत मिलने पर नाहर दरवाजा थाने में प्रकरण दर्ज कर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की। डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस टीम झारखंड के गिरिडीह जिले तक पहुंची और चार आरोपितों को गिरफ्तार किया। उनके खातों को फ्रीज कर 4.01 लाख रुपये बरामद किए गए।

चार आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों में रोशन मोदी, सुजीत कुमार, सुजीत पासवान और सुजीत चंद्रवंशी शामिल हैं, जो गिरिडीह (झारखंड) के ग्राम मंगसो, ग्राम श्रीराम ढिह और ग्राम बडरान के निवासी हैं।

ई-जीरो एफआईआर से मिली मदद

एसपी ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए ई-जीरो एफआईआर प्रणाली लागू की गई है, जिसमें एक लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल पर दर्ज होते ही भोपाल साइबर मुख्यालय में स्वतः दर्ज हो जाती है और तत्काल कार्रवाई शुरू हो जाती है। इससे बैंक खाते फ्रीज कर राशि बचाने में मदद मिल रही है।

ऑपरेशन साइबर के आंकड़े

देवास पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन साइबर” के तहत अब तक 2.50 करोड़ रुपये से अधिक राशि होल्ड करवाई जा चुकी है, जबकि 2.43 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए हैं। साथ ही साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे 2500 मोबाइल नंबर ब्लॉक कराए गए हैं और 160 लोगों को डिजिटल अरेस्ट से बचाया गया है।

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