बस्तर का इंद्रावती टाइगर रिजर्व 40 वर्ष बाद पर्यटन के लिए 1 नवंबर से खुल जायेगा

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बीजापुर। बीजापुर जिले से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए चार दशकों तक अशांति और सुरक्षा कारणों से वीरान पड़ा इंद्रावती टाइगर रिजर्व लगभग 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सैलानियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। इलाके से नक्सलवाद के खात्मे और शांति बहाली के बाद वन विभाग ने इस अभयारण्य को आगामी 1 नवंबर 2026 से पर्यटकों के लिए आधिकारिक रूप से खोलने का निर्णय लिया है। यह पहल बस्तर को देश के प्रमुख वाइल्डलाइफ और ईको-टूरिज्म मैप पर दोबारा स्थापित करेगी। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सैलानियों के सुरक्षित और सुव्यवस्थित भ्रमण के लिए वन विभाग युद्ध स्तर पर तैयारियां कर रहा है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने जंगलों और बाघों के प्राकृतिक रहवास के लिए पहचाना जाता है। अस्सी के दशक में उपजी परिस्थितियों के कारण यहां पर्यटकों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई थी। अब शांति का माहौल बनने के बाद सरकार इस वन क्षेत्र को दुनिया के सामने लाने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सैलानियों को रोमांचक वन्यजीव दर्शन का अनुभव देने के साथ-साथ बस्तर की विशिष्ट जनजातीय जीवनशैली, कला और लोक संस्कृति से रूबरू कराना भी है। वन्यजीवों के प्राकृतिक वातावरण में खलल न पड़े, इसके लिए पर्यटकों और वाहनों की दैनिक अधिकतम संख्या यानी वहन क्षमता (कैरींग कैपेसिटी) का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है। क्षमता निर्धारण के बाद विभाग द्वारा ऑनलाइन व ऑफलाइन बुकिंग विंडो, एंट्री गेट और गाइड शुल्क से संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, जिससे सैलानी समय रहते अपनी यात्रा की योजना बना सकेंगे।



