छत्तीसगढ़ में 7 लाख अनियमित और आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे सरकारी कामकाज, नियमितीकरण पर सियासत तेज

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रायपुर। राज्य के सरकारी महकमों में स्थायी नियुक्तियों की कमी ने व्यवस्था को आउटसोर्सिंग के जाल में फंसा दिया है। वर्तमान में करीब सात लाख अनियमित और आउटसोर्स कर्मचारी सरकारी बोझ उठा रहे हैं, जबकि नियमित कर्मियों की संख्या महज चार लाख है। सरकारी व्यवस्था का 60 प्रतिशत भार अनियमित कर्मियों पर है।

प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से भर्तियां
प्रदेश में लगभग इतने ही पद रिक्त हैं। एक ओर युवा स्थायी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से भर्तियां कर रही है। आंकड़ों के अनुसार 1,01,166 आउटसोर्स कर्मियों के सहारे प्रशासनिक पहिए चल रहे हैं।
सबसे अधिक अनियमित कर्मचारी ऊर्जा विभाग (27,000) और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (25,000) में कार्यरत हैं। अन्य श्रेणी में 14,000 कर्मचारी हैं। लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 9,000, सहकारिता विभाग में 7,600 और वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग में 7,500 कर्मचारी कार्यरत हैं। स्कूल शिक्षा, कौशल विकास, आवास, समाज कल्याण और श्रम विभाग में भी उल्लेखनीय संख्या है।
आउटसोर्सिंग के जरिए राज्य के बाहर के लोगों से भी कार्य लिया जा रहा है। स्थायी नीति के अभाव और ठेका प्रथा के बढ़ते चलन ने युवाओं में असुरक्षा का भाव पैदा किया है।
कांग्रेस का चुनावी वादा अधूरा
पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने अनियमित कर्मियों को नियमित करने का चुनावी वादा किया था। इसके लिए 11 दिसंबर 2019 को प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई थी, लेकिन यह कमेटी कोई ठोस परिणाम नहीं दे सकी।
28 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने राज्य स्तरीय प्रदर्शन किया था और नियमितीकरण की मांग दोहराई थी। वर्तमान में कांग्रेस भाजपा को घेर रही है, जबकि भाजपा कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है।



