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मां मातंगी धाम रायपुर पहुंची महाराष्ट्रीय गौरव यात्रा; प्रेमा साईं महाराज ने दिया शिवाजी महाराज का संदेश

 

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 नासिक  से   जगन्नाथ पुरी के बाद महाराष्ट्रीय गौरव यात्रा मां मातंगी धाम जीजामगांव पहुंची। इस दौरान धाम में इस यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। विधिवत पूजा अर्चना के बाद आरती की गई। फिर श्रद्धालु ढोल-नगाड़े के बीच नाचते गाते हुए इस यात्रा का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इस दौरान पूरा वातावरण भगवामय नजर आया।

वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरव गाथा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से महाराष्ट्रीय गौरव यात्रा नासिक से जगन्नाथ पुरी पहुंची। फिर यहां से मातंगी धाम रायपुर पहुंची। इस एतिहासक अवसर पर मां मातंगी धाम के पीठाधीश्वर डॉक्टर प्रेमा साईं महाराज ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। इस मौके पर मां मातंगी धाम में पहुंचे हजारों सनातनियों ने इस भव्य यात्रा का स्वागत किया और वीर छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरगाथा को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

मां मातंगी के पीठाधीश्वर डॉक्टर प्रेमा सांई महाराज ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य वीर छत्रपति शिवाजी महाराज के संदेश को लोगों को पहुंचाना है। उन्होंने देश को बचाने के लिये किस प्रकार से मुंगलों से लड़ाइयां लड़ीं इसका इतिहास गवाह है। सनातन धर्म को बचाने के लिए उन्होंने जो कार्य किया है, उसे सभी सनातनियों तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्हें जगाने की जरूरत है क्योंकि सनातनी अभी भी सोए हुए हैं। सनातन धर्म को बचाने के लिए वीर शिवाजी महाराज ने अभूतपूर्व काम किया है।

प्रेमा साईं महाराज खुद सरगुजा से लेकर बस्तर तक सनातनियों को जगाने के लिए कार्य रहे हैं। हिंदुओं को वापस उनके मूल धर्म में ला रहे हैं।  वहीं यात्रा के प्रमुख ने बताया कि 3500 किलोमीटर की इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य वीर छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदुओं को बचाने के लिए किए गए कार्य को जनमानस तक पहुंचाना है

बता दें कि धमतरी जिले के कुरुद तहसील के जीजामगांव में है। इसे मां मातंगी का दिव्य दरबार कहा जाता है। बताया जाता है कि माता पार्वती के 10 महाविद्याओं में से एक उग्र देवी ही मातंगी हैं। इन्हें तंत्र-मंत्र की देवी भी कहा जाता है।

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