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भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को किसी भी समय और स्थान पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी

 

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 छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के मुद्दे पर राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस शासन के दौरान नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई न होने का दावा किया था. बघेल ने शाह के आरोपों को “सफेद झूठ” करार देते हुए उन्हें किसी भी समय और स्थान पर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है.

बघेल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि अमित शाह के दावे न केवल भ्रामक हैं, बल्कि उन सुरक्षाकर्मियों का भी अपमान हैं जिन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों में अपना बलिदान दिया. उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में बस्तर के 600 गांवों को नक्सल मुक्त कराया गया और वन अधिकार अधिनियम, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं के जरिए स्थानीय लोगों का विश्वास जीता गया.

बघेल ने शाह को उनका पुराना वादा याद दिलाते हुए सवाल किया कि नक्सल मुक्त घोषित होने वाले गांवों को 1-1 करोड़ रुपये देने की घोषणा का क्या हुआ?
दूसरी ओर, वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भूपेश बघेल के दावों पर कड़ा प्रहार किया है. साय ने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने केंद्र के साथ सहयोग नहीं किया और नक्सलवाद से लड़ने में पूरी तरह विफल रही.

उन्होंने कहा कि 2023 में सत्ता संभालने के बाद हुई समीक्षा में पता चला कि देश की 75 प्रतिशत नक्सली गतिविधियां केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित थीं. 

मुख्यमंत्री ने बघेल के बयानों को अपनी असफलताओं को छिपाने की कोशिश करार दिया है. वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि राज्य में नक्सलवाद का प्रसार रमन सिंह के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों के दौरान ही हुआ था.

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