Saturday, February 4, 2023
Homeछत्तीसगढ़मानव के भाव-विचारों का अध्ययन कर परिवार को बना सकते हैं हैप्पी

मानव के भाव-विचारों का अध्ययन कर परिवार को बना सकते हैं हैप्पी


जड़ संसार को क्लासरूम में पढ़ाया जा सकता है तो चैतन्य संसार को क्यों नहीं

जीवन विद्या शिविर का आयोजन निरंजन धर्मशाला में

रायपुर 23 दिसंबर। हैप्पी फैमिली विषय पर अभिभावक विद्यालय रायपुर एवम अभ्युदय संस्थान अछोटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय जीवन विद्या शिविर आज से वीआईपी रोड स्थित निरंजन धर्मशाला में प्रारंभ हुआ। इसमें प्रबोधक श्री सोम देव त्यागी ने कहा कि विज्ञान ने काफी प्रगति की है। हम मशीनों के बारे में पूरा अध्ययन करते हैं तो मशीन को बनाना और उसे चलाने में विशेषज्ञ हो जाते हैं, लेकिन हममे मानव जीवन की समझ नहीं बनी है। हमारे पास ऐसी कोई शिक्षा प्रणाली नहीं है जिसमें मानव के भाव और विचार का अध्ययन हो सके।

30 दिसंबर तक चलने वाले इस शिविर में छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, इसमें सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक चार सत्रों में प्रबोधन होता है। मध्यस्थ दर्शन पर आधारित इस शिविर में परिवार और समाज को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। श्री त्यागी ने कहा कि मनुष्य भाव और विचार से सुख या दुखी होता है। हर मानव सुख चाहता है, हर कोई बेहतर जीवन जीना चाहता है, परन्तु जीवन योग्यता और आत्मविश्वास से चलता है।

उन्होंने कहा कि 50 साल पहले शादी परंपरागत तरीके से होती थी, आज वर-वधू में समान समझ देखी जाती है। पहले मानव को जीवनयापन करने के लिये बहुत अधिक श्रम करना पड़ता था लेकिन आज की पीढ़ी के सामने मानसिक श्रम अधिक है।

उन्होंने कहा कि हर मानव के पास कल्पनाशीलता और कर्म स्वतंत्रता है। चाहे अमीर हो या गरीब, सभी में सोचने की ताकत समान है, वह उस ताकत को जिस दिशा में लगाता है, उस दिशा में परिणाम आता है।

उन्होंने कहा कि गरीब साधन विहीन होने के कारण दुखी दरिद्र रहता है। लेकिन अमीर साधन सम्पन्न होते हुए भी दुखी दरिद्र होते हैं, उनमें और कमाने की लालसा रहती है। इसलिये साधन के साथ उदार और सुखी होना चाहिये। यह हर मानव अपनी आवश्यकताओं का निर्धारण करके कर सकता है।
श्री त्यागी ने कहा कि हजारों साल पहले अध्यात्म और धर्म ने निष्कर्ष दिया कि इंद्रिय, धन और पद के सहारे जीकर सुखी नहीं रहा जा सकता है।
आदमी भाव और विचारों से ही निरंतर सुख को प्राप्त कर सकता है। जिसकी अपने से बात हो गई, उसे अपनों से बात हो गई। जिसकी अपने से बात नहीं हुई, वह किसी के साथ संतुष्ट नहीं रह सकता।

Most Popular

- Advertisment -spot_img