Wednesday, November 30, 2022
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डॉ नंदकुमार साय ने संस्कृत के श्लोकों का उदाहरण देकर भागवत कथा पर प्रकाश डाला पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा

भिलाई। चरोदा में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दूसरे दिन कथा में सम्मिलित होने पहुंचे छत्तीसगढ़ के प्रथम नेता प्रतिपक्ष डॉ नंदकुमार साय ने भागवताचार्य पं. लोकेश कृष्ण दुबे का पुष्पहार से स्वागत कर भागवत भगवान की पूजा अर्चना की! भागवताचार्य के आग्रह पर डॉ.साय ने भागवत कथा की महिमा पर संस्कृत के श्लोकों का उदाहरण देते हुए प्रकाश डाला जिसके चलते पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा! डॉ.साय ने हिंदू एवं हिंदुत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि पुराणों एवं वेदों का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदुत्व ही समस्त धर्मों का सार है! हमारे हिंदुत्व में धर्म के दस लक्षण विघमान हैं! उन्होंने भागवत कथा की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कथा में सभी वर्गों की साझेदारी एवं भागीदारी होती है,यह कथा हमें ज्ञान के साथ भगवान की भक्ति भी प्रदान करती है! भगवान की भक्ति ही समस्त सुखों का भंडार ह! डॉ. साय ने छत्तीसगढ़ में हो रहे धर्मांतरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए ऐसे आयोजनों की सराहना की!डॉ.साय ने कहा कि श्रीमद भागवत की कथा समाज में समता भाव विकसित करती है! जिसका वर्णन हमारे आदर्श पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने साहित्यो में किया है! समता मूलक समाज बनाने में श्रीमद् भागवत की कथा का जनमानस में बहुत बड़ा योगदान है! पूरे विश्व में लोकतंत्र भारत में ही विकसित हुआ है! राम राज इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है!डॉ. साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री श्री अमित शाह की सराहना करते हुए हिंदू एवं हिंदुत्व की विचारधारा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारा हिंदुत्व कण-कण में ईश्वर को देखता तथा प्रत्येक जीव का आदर करना जानता है!

भागवताचार्य पंडित लोकेश कृष्ण दुबे ने डॉ.साय के हिंदू धर्म ग्रंथों के बारे में विशद जानकारी की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके आगमन से पूरे चरौदा वासी प्रफुल्लित एवं आनंदित है! श्रोताओं के तालियों की गड़गड़ाहट डॉ.साय की उदभट विदवता की परिचायक है!भागवता चार्य पंडित लोकेश कृष्ण दुबे ने भक्त पहलाद एवं भक्त ध्रुव की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि भक्तों के कारण भगवान इस धरा-धाम पर अवतरित होते हैं! जिनके भुकुटी विलास से संसार का श्रीजन एवं प्रलय हो जाता है ऐसे प्रभु राक्षसों को मारने के लिए अवतरित नहीं होते! भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने एवं आनंद प्रदान करने के लिए ही इस धरा-धाम पर अवतरित होते हैं! भगवान की भक्ति वस्तुत: एक सामाजिक व्यवस्था है जिसके चलते समाज के सभी लोग जाति वर्ण उच्च-नीच,छुआछूत आदि से परे होकर एक साथ मिलकर आनंद पूर्वक अपने जीवन का निर्वाह कर ले यही भगवान की भक्ति है! भक्त सभी लोगों में अपने ईश्वर का स्वरूप मानकर आचरण करता है इसलिए उसके आचरण में कोई खोट नहीं होता! आज पूरा विश्व भगवान की भक्ति को सार्थक मान रहा है तथा विदेशी लोगो का भी हिंदू धर्म एवं हिंदुत्व के प्रति आस्था बढ़ी है! भागवताचार्य पंडित लोकेश कृष्ण दुबे कथा में पहुंचे मुख्य अतिथि डॉ नंदकुमार साय एवं उनके साथियों आशीर्वाद देते हुए उनके प्रति धन्यवाद प्रकट किया! कथा को सफल बनाने में सर्वश्री महेंद्र वर्मा (जोगी), श्रीमती श्याम कँवर, नागेंद्र वर्मा चरौदा सरपंच छागेन्द्र वर्मा, निलेश्वरी माया,ईश्वरी, दीपेश शर्मा, निखिल तिवारी,टिकेश्वरी, लाता वर्मा, खुशी, मन, बसंत धीवर का सहयोग सराहनीय रहा! कथा का समय मध्यान्ह 1:00 बजे से साय 4:30 बजे तक है!

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