Tuesday, December 6, 2022
Homeछत्तीसगढ़विकासखंड लैलूंगा की ग्राम पंचायतो में भ्रष्टाचार की ऐसी कहानी लिखी गयी...

विकासखंड लैलूंगा की ग्राम पंचायतो में भ्रष्टाचार की ऐसी कहानी लिखी गयी है जो कि संभवतः प्रदेश में पहला मामला हो…

जांच पड़ताल में ऐसे किस्से सामने आए की पूर्व खनन बोर को ही बोर खनन और पम्प स्थापना व्यय दिखा लाखो की राशि निकली गयी

लैलूंगा– पंचायती राज की स्थापना सत्ता का विकेंद्रीकरण था साथ ही निचले स्तर पर फैसले लेकर ग्राम स्वराज लाना था लेकिन कतिपय चुने हुए जनप्रतिनिधि ने पंचायत सचिव से मिलकर भ्रष्टाचार की ऐसी कहानी लिखी जो कि लालकिले से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की स्वीकारोक्ति को भी झुठला रही है। पूरी की पूरी आबंटित राशि का ही गबन सरपंच सचिव ने मिलकर किया है। कुल 11,86,311 की चौदहवें वित्त आयोग की राशि का गबन सचिव रमेश कुमार पटेल एवं सरपंच शांति भगत ने मिलकर किया है।
केंद्र सरकार द्वारा पंचायतों को आर्थिक सुदृण बनाने चौदहवें व पंद्रहवे वित्त आयोग के माध्यम से पंचायत को सीधे राशि पंचायत के खाते में अंतरित की। जिसे ग्राम पंचायत बिरसिंघा के सरपंच और सचिव रमेश पटेल ने फर्जी कार्य दिखाकर गबन कर लिया। पूर्व में अन्य मद से स्वीकृत बोर खनन और निजी व्यय से पंप स्थापना को ग्राम पंचायत के मद से लगाना दिखाकर राशि हड़प कर ली। बोर खनन और पम्प स्थापना ऐसे बोर को दिखाते हुए किया गया कि जिला या अन्य जांच टीम को कभी भी दिखाया जा सकता है। लेकिन जमीनी हकीकत का पता लगाने जब भास्कर संवाददाता ग्राम बिरसिंघा गया तो ऐसी सच्चाई का पता चला जो कि अचरज कर देने वाली थी। मंगलू घर के पास बोर खनन और पंप स्थापना के नाम पर क्रमश राशि 69350 एवं 49425 दिनाक15.12.21 एवं 16.11.21 को PFMS क्रमांक FFC/21-22/P/32 एवं FFC/21-22/P/9 से निकली गयी।जबकि मंगलू ने बताया कि यह बोर 2019 में विधायक चक्रधर सिंह सिदार ने स्वयं खड़े होकर कराया था यंहा यह बताना लाजमी होगा कि मंगलू की पत्नी रायमुनि चौहान जनपद पंचायत लैलूंगा में मुगडेगा क्षेत्र की बीडीसी है।वर्षो पूर्व के कार्यो को नया दिखाकर राशि का गबन किया गया है।
टीम जब आगे बढ़ी तो ठीक सामने मिशन स्कूल के नाम से भी बोर खनन और पंप स्थापना के लिए राशि क्रमशः69015 एवं 49890 दिनाक15.12.21 एवं 16.11.21 को PFMS क्रमांक FFC/21-22/P/34 एवं FFC/21-22/P/20 निकलने के प्रमाण मिले। मिशन स्कूल के प्रभारी फादर मथुरा टोप्पो से जब जानकारी ली तो पता चला कि बोर खनन और पंप कई साल पहले किया गया है। दिसंबर 2021 में कोई भी बोर संस्था में नही खनन किया जाना बताया।
अवलदार घर के पास बोर खनन व पम्प स्थापना के लिए क्रमश राशि 89910 एवं 49535 दिनाक15.12.21 एवं 16.11.21 को PFMS क्रमांक FFC/21-22/P/29 एवं FFC/21-22/P/14 से निकली गयी। कंदरु घर के पास बोर खनन व पम्प स्थापना के लिए क्रमश राशि 69300 एवं 49675 दिनाक15.12.21 एवं 16.11.21 को PFMS क्रमांक FFC/21-22/P/30 एवं FFC/21-22/P/12 से निकली गयी।निर्मल घर के पास बोर खनन व पम्प स्थापना के लिए क्रमश राशि 69190 एवं 49346 दिनाक15.12.21 एवं 16.11.21 को PFMS क्रमांक FFC/21-22/P/31एवं FFC/21-22/P/8 से निकली गयी। बिरसिंघा ग्रामवासी बजरंग ,विमल, पांडे, समीर बलसाय, शिव कुमार, बुधराम, डोमो, मिखेल घर के पास पम्प स्थापना के लिए राशि निकली गयी है जबकि इस सभी के द्वारा स्वयं के व्यय से पंप सामग्री खरीदी है। कुल 11,86,311 की चौदहवें वित्त आयोग की राशि का गबन सचिव रमेश कुमार पटेल एवं सरपंच शांति भगत ने मिलकर किया है। पूर्व में अन्य मद से खोदे गए बोर को वर्ष 2021-22 में बोर खनन और पम्प स्थापना व्यय दिखाकर राशि डकार ली है।

चौदहवें एवं पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि की नही होती मॉनिटरिंग

केंद्र सरकार द्वारा आबंटित 14वे एवं 15वे वित्त आयोग की राशि का आबंटन सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जाता है।जिसे सरपंच सचिव के द्वारा बिल के माध्यम से पूर्व में पंजीकृत सप्लायर के खाते में ट्रांसफर की जाती है। नियमानुसार उक्त मद की राशि मे से 50000 से अधिक की राशि व्यय करने के लिए इस्टीमेट और मूल्यांकन आवश्यक है।लेकिन जनपद पंचायत क्षेत्र की किसी भी पंचायत में यह नियम का पालन नही किया जाता। राशि सीधे सप्लायर के खाते में PFMS के माध्यम से डाल दी जाती है।जिसका व्यय से संबंधित ब्यौरा में केवल बिल ही प्रस्तुत किया जाता है। इस्टीमेट,MB रिकार्ड नही कराने से मनमर्जी से सरपंच सचिव के हस्ताक्षर मात्र से राशि का ट्रांसफर हो जाता है।

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